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परिवार की रूढ़ियों ने जिस बेटी को गाने से रोका, उसे ही पद्मश्री देकर भारत ने किया सम्मानित

Wed, 25 Mar 2020 10:40 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Wed, 25 Mar 2020 10:40 AM IST
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shakti: padma shri award honored lady singer basanti bisht struggle story
basanti bisht - फोटो : social media

आज हम शक्ति विशेष में एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने समाज की रूढ़ियों को तोड़ा और उस मुकाम को हासिल किया कि आज दुनिया उस पर गर्व महसूस करती है। इस महिला ने परिवार की बंदिशों को तोड़कर दुनिया में अपना नाम कमाया है। 2017 में इन्हें संगीत के क्षेत्र में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। तो चलिए जानें उस अद्भुत महिला के बारे में....


 
shakti: padma shri award honored lady singer basanti bisht struggle story
- फोटो : AmarUjala

हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड निवासी 66 साल की बसंती बिष्ट की। बसंती बिष्ट का जन्म उत्तराखंड के एक सीमांत गांव ल्वाणी में हुआ। यह गांव नंदा देवी राजजात यात्रा के मार्ग पर स्थित है। नंदा देवी को क्षेत्र के लोग अपनी बेटी की तरह पूजते हैं। इसलिए यहां वर्षों से नंदा देवी के जागर गायन की परंपरा विद्यमान है।


 
shakti: padma shri award honored lady singer basanti bisht struggle story
Basanti Bisht - फोटो : AmarUjala

जागर गायन को मूलत: पुरुषों का कार्य माना जाता था। गांव और पहाड़ में महिलाओं के मंच पर जागर गाने की परंपरा नहीं थी। इसलिए बचपन में जब बसंती ने जागर गाने की अपनी इच्छा जाहिर की तो उनके खुद के परिवार ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।

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Basanti Bisht - फोटो : AmarUjala

बसंती को बचपन से संगीत में रूचि थी लेकिन सामाजिक बेड़ियों के चलते के चलते उनकी यह हसरत पूरी नहीं हो सकी।  लेकिन उन्होंने अपनी ये हसरत शादी के बाद पूरी की। उनके पति रणजीत सिंह ने उन्हें प्रोत्साहित किया। पति ने उन्हें गुनगुनाते हुए सुना तो विधिवत रूप से सीखने की सलाह दी। पहले तो बसंती तैयार नहीं हुई लेकिन पति के जोर देने पर उन्होंने सीखने का फैसला किया। हारमोनियम संभाला और विधिवत रूप से सीखने लगी।

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उत्तराखण्ड आन्दोलन के समय मुजफ्फरनगर, खटीमा और मसूरी गोलीकांड की पीड़ा को बसंती बिष्ट ने गीत में पिरोया और राज्य आंदोलन में कूद पड़ी। अपने लिखे गीतों के जरिये वह लोगों से राज्य आंदोलन को सशक्त करने का आह्वान करती। राज्य आंदोलन के तमाम मंचों पर वह लोगों के साथ गीत गाती। इससे उन्हें मंच पर खड़े होने का हौसला मिला।

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