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'मोती' उगाती है आगरा की ये बेटी, तस्वीरों में देखें कैसे होती है खेती

Tue, 07 Jan 2020 01:14 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Tue, 07 Jan 2020 01:14 PM IST
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pearl farming in Agra by woman
- फोटो : अमर उजाला

आगरा में एक ऐसी बेटी है जो घर पर मोती उगाती है। जी हां आपने सही सुना घर पर ही एक ड्रम में किए प्रयोग से हौसला बढ़ा और अब इस युवती ने मोती उगाने की ट्रेनिंग लेकर इस काम को शुरू कर दिया है। मोती उगाने वाली इस बेटी का नाम है रंजना यादव। 14 गुणा 14 फीट के तालाब में मोती की फसल लगाकर अब इसमें दो हजार सीप डाली गई है।


 
pearl farming in Agra by woman
मोती की खेती - फोटो : अमर उजाला

रंजना के अनुसार आगरा में मोतियों की खेती का ये पहला प्रयास है। बात लगन की है। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंस से एमएससी कर चुकी रंजना ने पढ़ाई के दौरान पर्लफार्मिंग के बारे में जाना। भुवनेश्वर जाकर पर्ल फार्मिंग का विधिवत प्रशिक्षण लिया। उन्होंने पिता सुरेश यादव के महर्षिपुरम स्थित प्लाट में तालाब बनाया। 



 
pearl farming in Agra by woman
मोती की खेती के लिए बनाया गया तालाब - फोटो : अमर उजाला

दो महीने पहले गुजरात से मंगाई गईं सीप इस तालाब में डाली। इन सीपों को तालाब में एक मीटर गहराई में लटकाए गए जालीदार बैग में रखा गया है। रंजना बताती हैं कि इसमें मानवीय प्रयास शामिल है लेकिन मोती प्राकृतिक रूप से पैदा होती हैं और इनकी मांग खूब है।

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मोती की खेती - फोटो : अमर उजाला
ऐसे बनता है मोती

प्राकृतिक रूप से मोती का निर्माण तब होता है जब रेत, कीट आदि किसी सीप के अंदर पहुंच जाते हैं। तब उसके ऊपर चमकदार परतें चढ़ती है। यह परत मुख्यत: कैल्शियम की होती है। मोती का उत्पादन भी इसी तरीके से होता है। सीप के अंदर 4-6 मिलीमीटर व्यास के ‘बीड या न्यूक्लियर’ डाले जाते हैं और तैयार होने पर मोती को निकाल कर पॉलिश किया जाता है।

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pearl farming in Agra by woman
- फोटो : social media
गहन देखभाल है जरूरी

न्यूक्लियर डालने से पहले और बाद में सीप को कई प्रक्रिया से गुजारा जाता है। प्रतिरोधक दवाएं और प्राकृतिक चारा (एल्गी, काई) दिया जाता है फिर तालाब में डाला जाता है। शुरूआत में रोज फिर एक-एक दिन छोड़कर निरीक्षण किया जाता है। बीमार सीपों को दवा देना, मृत सीपों को हटाना, तालाब में ऑक्सीजन का इंतजाम करना और बैग की सफाई आदि जरूरी है।  

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