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स्कूल के छात्रों से तंग आकर 9 साल की बच्ची ने बनाया Anti Bullying App

Sun, 16 Feb 2020 10:30 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Sun, 16 Feb 2020 10:30 AM IST
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nine year old shillong girl developed anti bullying app
- फोटो : social media

बहुत सी लड़कियां स्कूल और घर के आसपास के माहौल में छेड़खानी से परेशान रहती हैं। कई बार तो वो इसके खिलाफ आवाज उठाना भी जरूरी नहीं समझती हैं। लड़कियों को लगता है कि अगर बुलिंग और छेड़खानी के  बारे में बताएंगी तो फिर उनका नाम बदनाम हो जाएगा। स्कूल में होने वाली ऐसी ही धमकियों परेशान होकर शिलांग की एक बच्ची ने एंटी बुलिंग ऐप बनाया है। 



 
nine year old shillong girl developed anti bullying app
- फोटो : social media

शिलांग की रहने वाली मैदाईबाहुन मोंजा ने इस ऐप को बनाया है। ये बच्ची कक्षा 4 की छात्रा है। स्कूल में मिलने वाली धमकियों से परेशान होकर मैदाईबाहुन मोंजा ने एंटी बुलिंग ऐप बनाया। जिसकी राज्य सरकार ने भी सराहना की है।


 
nine year old shillong girl developed anti bullying app
- फोटो : social media

दाईबाहुन मॉजा का कहना है कि वह जब नर्सरी से में थी, तभी से धमकियां मिल रही थीं। इससे मुझे प्रभावित किया। इससे परेशान होकर मैंने इस परेशानी का हल निकालने का फैसला किया। मैं नहीं चाहती थी कि कोई और बच्चा इस तरह की घटनाओं का सामना करे। उसने बताया कि स्टूडेंट्स के एक समूह ने एक बार उसके खिलाफ गैंग बना लिया था। दूसरे स्टूडेंट्स से भी  बात न करने को कहा। उनमें से एक ने मेरे पैरों पर मुहर लगा दी थी।



 
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nine year old shillong girl developed anti bullying app

मोंजा ने बताया कि ऐप का इस्तेमाल करने का तरीका बहुत ही आसान है। इस ऐप की मदद से यूजर को धमकी देने वाले के नाम सहित पूरी घटना का विवरण देना होगा। इसके साथ ही इस ऐप की मदद से व्यक्तिगत रूप से भी संबंधित व्यक्तियों को संदेश भेजा जा सकता है। 



 
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nine year old shillong girl developed anti bullying app
- फोटो : Pixabay
मॉजा की मां दासुमलिन माजॉ ने बताया कि उसने पिछले साल सितंबर में एक ऐप-डेवलपमेंट कोर्स में दाखिला लिया था। इसके बाद कुछ महीनों में उसने ऐप डेवलप करना सीख लिया। विप्रो अप्लाइंग थॉट्स इन स्कूल्स और टीचर फाउंडेशन ने 2017 में एक सर्वे किया था, जिसमें खुलासा हुआ था कि भारत में 42 प्रतिशत बच्चों को स्कूलों में तंग किया जाता है।
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