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महिला अधिकारों को लेकर कब बनेंगे कठोर कानून?

Wed, 15 Jan 2020 07:01 AM IST
Veena Nagpal वीना नागपाल
Updated Wed, 15 Jan 2020 07:01 AM IST
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Laws for protection of women rights in India surrogacy Human Trafficking Transgenders
महिलाओं की सुरक्षा (सांकेतिक तस्वीर)

महिला अधिकारों को लेकर पिछली संसद में भी खूब बहस हुई थी और तब चुनाव आ गया इसलिए महिला अधिकारों को लेकर जो ठोस कदम सरकार द्वारा उठाए जाने चाहिए थे वह वहीं के वहीं थम गए अर्थात् उन्हें कानूनी जामा न पहनाया जा सका। यह अधिकार ऐसे थे जिन पर केवल बहस में ही समय जाया नहीं किया जाना चाहिए था बल्कि इन पर तुरंत एक्शन लेकर इन्हें कानूनी जामा पहना दिया जाना आवश्यक था।



दो मुख्य बिल थे- सरोगेसी (किराये की कोख) और महिला तथा बच्चियों की तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) से संबंधित कानून। दोनों ही समाज के लिए बहुत आवश्यक हैं और इनसे महिलाओं की सुरक्षा मुख्य रूप से जुड़ी हुई है। सरोगेसी के लिए बिल तो प्रस्तुत हुआ पर वह कानून नहीं बना है। उसमें कुछ ऐसे बिंदु भी हैं जिन पर कई पक्षों को आपत्ति है।

Laws for protection of women rights in India surrogacy Human Trafficking Transgenders
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

उदाहरणत: उसमें कहा गया है कि सरोगेसी कोई व्यापार नहीं है, जिस तरह बाजार में जाकर कोई मनपसंद वस्तु खरीद ली जाती है उस तरह किराए की कोख किराए पर नहीं ली जा सकती है, इसलिए ही बिल में कहा गया है कि अपनी निकट संबंधी महिला की इसमें सहायता ली जा सकती है। लेकिन किसी पराई महिला के कुछ धन राशि चुकाकर उससे किराए की कोख लेकर संतान प्राप्त करना अपराध माना गया तथा साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि कोई महिला अपने कोख का व्यापार करती है तो उसे भी अपराधी माना जाएगा।

Laws for protection of women rights in India surrogacy Human Trafficking Transgenders
महिलाओं के अधिकार (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay.com

इस पर बहुत विरोध हुआ। कहा गया कि और वह भी किराए की कोख देने वाली महिलाओं ने कहा कि हम पर बहुत आर्थिक मुसीबतें हैं जिनका समाधान सरोगेसी से हो जाता है। सरकार ऐसा कानून न बनाए नहीं तो हम पर आर्थिक बोझ आ जाएगा। हम कैसे अपना घर- परिवार चलाएंगें। सरोगेसी के इस खुले व्यापार का विरोध करने वाले भी संतुष्ट नहीं थे। उनका कहना था कि जिन बातों को हम कानून में शामिल करना चाहते हैं वह तो हुई ही नहीं। केवल सतही तौर पर सरोगेसी की गंभीर समस्या पर बात की गई है।

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Laws for protection of women rights in India surrogacy Human Trafficking Transgenders
सांकेतिक तस्वीर

बिल अभी इस सत्र में पेश नहीं हुआ है इसलिए शायद लंबा इंतजार करना पड़े। ह्यूमन ट्रैफिकिंग एक भीषण समस्या है जिसे लेकर भारत ही नहीं संयुक्त राष्ट्रसंघ का बाल विभाग भी बहुत चिंतित है। विश्व भर में यह समस्या मौजूद है। जहां-जहां गरीबी, अभाव और अशिक्षा मौजूद है वहां यह समस्या बहुत भीषण रूप में दिखती है। हम सब जानते हैं कि भारत अभी भी समाज में मौजूद गरीबी से लड़ रहा है।

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Laws for protection of women rights in India surrogacy Human Trafficking Transgenders
सांकेतिक तस्वीर

शासन अभी तक इसे गरीबी से मुक्त नहीं कर सका है। ऐसे अभावग्रस्त परिवारों में गरीबी के कारण बच्चों की कोई देखभाल नहीं होती। मानव तस्करी के दलाल परिवारों को आर्थिक लालच देकर उनके बच्चों का व्यापार करते हैं। इस मानव तस्करी में बच्चियों का शोषण सबसे अधिक होता है। यह बच्चियां किस नर्क में ढकेल दी जाती हैं कि उन पर होने वाले अत्याचारों की बातें सुनकर रूह कांप जाए। इस हेतु सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है। वह भी कब बनेगा कहा नहीं जा सकता। बेहतर होगा कि इन समस्याओं पर शोर न मचाया जाए, बल्कि  कानूनी रूप देने के लिए काम किया जाए। इनपर कानून बन जाने की हम सब प्रतीक्षा कर रहें हैं।

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