सबसे कम उम्र में राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार पाने वाली एक बच्ची, जिसने अपने कामों से हर किसी को प्रभावित किया। इस बच्ची के हौंसले से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री ने भी इससे मुलाकात की और एक पौधा भेंट स्वरूप दिया। तो चलिए जानें कौन है ये छोटी बच्ची ईहा।
नन्हीं बच्ची ईहा दीक्षित, जिसे मिला सबसे कम उम्र में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार
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ईहा दीक्षित लोहिया नगर स्थित सेंट फ्रांसिस वर्ल्ड स्कूल में पढ़ती है। बताया गया कि ईहा का कक्षा में भी उत्तम प्रदर्शन रहता है। वहीं प्रधानाचार्य सौमेन चक्रवर्ती ने बताया था कि वह अपने सहपाठियों के साथ मधुर व्यवहार करती है।ईहा दीक्षित के पिता कुलदीप शर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में अमर उजाला संस्थान के साथ काफी समय तक जुड़े रहे। हालांकि वर्तमान में वह एक कोचिंग सेंटर चला रहे हैं। जबकि ईहा की माता अंजली एक स्कूल में अध्यापिका हैं।
दिलचस्प बात यह है कि ईहा दीक्षित फेसबुक पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। वह हर रविवार को ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण करती हैं और फिर अपने फोटो को फेसबुक पर अपलोड करती हैं। ईहा के इस काम की सोशल मीडिया पर काफी सराहना होती है। इतना ही बल्कि लोग सोशल मीडिया के जरिए उनकी इस पहल से जुड़ते भी हैं। ग्रीन ईहा स्माइल क्लब की संचालिका इस नन्हीं सी बच्ची ईहा दीक्षित ने घर के बगीचे में नीबू का पौधा लगाकर यह अभियान शुरू किया।
पिता कुलदीप शर्मा ने बताया कि बेटी को शुरू से ही कुछ अलग काम करने की जिद रहती थी। किसी टीवी कार्टून में इसने प्लांट्स का महत्व देखा। प्लांट्स एनवायरमेंट बचाते हैं, पॉल्यूशन खत्म करते हैं, यह बात उसके जेहन में बैठ गई। मई के एक रविवार को उसने मन की बात में पीएम नरेंद्र मोदी को पौधों पर चर्चा करते सुना। तभी मम्मी अंजली से जिद करने लगी कि मैं पौधे लगाऊंगी। हमने घर के बगीचे में माली के साथ उसने नींबू का पौधा लगाया। उसके बाद रोज और पौधे लगाने की जिद करने लगी। ये एक अच्छी जिद थी, इसलिए हमें माननी पड़ी। हम लोग हर रविवार घर और आसपास की खाली जगह में पौधा लगवाने लगे। उसे सोशल मीडिया पर साझा करने लगे। 29 सितंबर को अपने जन्मदिन पर 1000 पौधे लगाए। इसी तरह यह कारवां बढ़ने लगा।
ईहा की मम्मी अंजली बताती हैं, इतनी छोटी सी बच्ची हर संडे खुद गड्डा बनाकर पौधा लगाती। इसे देखकर लोग सराहना तो करते लेकिन साथ देने नहीं आए। 2018 में हमने इसके क्लब ग्रीन ईहा स्माइल क्लब को शुरू कराया। तब क्लब के साथ पौधे लगने लगे। धीरे-धीरे कुछ बच्चे हमसे जुड़े। अभी छह बच्चे क्लब से जुड़े हैं। सभी ईहा से बड़े हैं। हमने किसी से संपर्क नहीं किया। ये बच्चे खुद ही दूर दूर से हमसे मिलने आए और क्लब से जुडे़। बच्चे खुद रविवार को पौधे लगाने आते हैं। कई बार जहां इन बच्चों में पौधे लगाए बाद में देखा तो वो पौधे लोगों ने उखाड़ दिए, आवारा पशु उन्हें खा गए। अपना लगाया पौधा जब उजड़ा देखा तो ईहा बहुत रोती थी। हम उसे समझाते कि बेटा काम करते रहो। आपके काम को सराहा जाए जरूरी नहीं, यह सब सहना पड़ता है।

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