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न बल्लेबाज, न ही गेंदबाज जब फिल्डर बने मैन ऑफ द मैच
Thu, 04 Feb 2016 12:10 PM IST
Updated Thu, 04 Feb 2016 12:10 PM IST
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वैसे तो क्रिकेट में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण (फिल्डिंग) तीनों ही अहम हैं। लेकिन मैन ऑफ द मैच या तो बल्लेबाज को मिलता है या फिर गेंदबाज को। लेकिन यहां मामला थोड़ा अलग है, जानते हैं, 5 ऐसे क्रिकेट मैचों के बारे में जब फिल्डरों ने बाजी पलटी और जिता गए मैच।
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1986 चैंपियंस ट्रॉफी का दूसरा मैच पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के बीच चल रहा था। कैरेबियाई टीम यह मैच 9 विकेट से जीता। इस जीत का श्रेय वेस्टइंडीज की पेस बैटरी नहीं बल्कि 'हवाई मैन' गुस लोगी रहे। यह पहली मर्तबा था जब मैन ऑफ द मैच किसी फिल्डर को चुना गया।
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1989-90 एमआरएफ वर्ल्ड सीरीज का दूसरा सेमीफाइनल मैच था। मुकाबला था वेस्टइंडीज और भारत के बीच। कैरेबियाई टीम ने यह मैच 8 विकेट से जीता। मैन ऑफ द मैच विवियन रिचर्ड्स रहे। लेकिन बल्लेबाजी पर नहीं फिल्डिंग के बल पर। टॉस जीतकर भारत ने बल्लेबाजी चुनी और 48.5 ओवरों में 165 रन ही बना सकी। कैरेबियाई टीम बिना अपने कप्तान विवियन की बल्लेबाजी के मैच जीत गई। इस मैच में विवियन ने तीन लाजवाब कैच लपके। जिनके बूते उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया था।
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1993-94 में वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका के बीच हीरो कप का चौथा मैच। अफ्रीकी फिल्डर जोंटी रोड्स (1992 वर्ल्ड कप में बेस्ट फिल्डर चुने गए थे) के आगे कैरेबियाई बल्लेबाजों की एक न चली। संशोधित 40 ओवरो के मैच में अफ्रीकी टीम 180 रन ही बना सकी। लेकिन कैरेबियाई बल्लेबाज यहां तक भी नहीं पहुंचे और 41 रन से मैच हार गए। फोटो में यह कैच ब्रॉयन लारा का था। रोड्स को आज भी दुनिया के सबसे बेहतर फिल्डर के तौर पर जाना जाता हैं।
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1992-93 ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच चल रहे बेंसन एंड हेड्स वर्ल्ड सीरीज के तीसरे मैच में कंगारू क्रिकेटर मॉर्क टेलर ने क्षेत्ररक्षण में कमाल किया। इससे पहले टॉस जीतकर ऑस्ट्रेलिया ने संशोधित 30 ओवरों के मैच में 9 विकेट पर 101 रन बनाए। कंगारू टीम यह मैच 14 रन से जीता। मॉर्क टेलर जो कि अपनी टीम में बतौर ओपनर थे, उन्हें मैन ऑफ द मैच बतौर फिल्डर चुना गया।
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