बांग्लादेश में खेले जा रहे अंडर-19 वर्ल्ड कप के 11वें संस्करण में टीम इंडिया सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है और चौथी बार उसे यह खिताब जीतने के लिए सिर्फ 2 जीत और चाहिए। इस टूर्नामेंट से कई युवा खिलाड़ियों पर सभी की नजर है क्योंकि यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां से भविष्य के लिए खिलाड़ियों को तराशने का एक नायाब विकल्प तो बनता ही है।
यूं ही नहीं खेला जाता अंडर -19 वर्ल्ड कप, जानें 9 खास बातें
पिछले एक-दो दशक में अंडर-19 वर्ल्ड कप से कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त पहचान बनाई और काफी सफल भी रहे। इस टूर्नामेंट ने जिस तरह से ढेरों महान क्रिकेटर दिए हैं उससे यह साबित हो गया कि यह अनावश्यक का टूर्नामेंट नहीं है और इसकी भी अपनी उपयोगिता है। जूनियर वर्ल्ड कप से 9 उन दिलचस्प बातों को जानते हैं जिसने इसे बेहद खास बना दिया।
यूं ही नहीं खेला जाता अंडर -19 वर्ल्ड कप, जानें 9 खास बातें
पहला, अंडर-19 वर्ल्ड कप में खेलने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में चयन करना चयनकर्ताओं के लिए भी एक सुगम रास्ता जैसा रहा है। 2000 में खेले गए इस टूर्नामेंट से 67 खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की जो किसी भी एक टूर्नामेंट से राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का एक रिकॉर्ड भी है। युवराज सिंह और शेन वाटसन जैसे बड़े सितारों ने इसी साल जूनियर वर्ल्ड कप खेला था।
यूं ही नहीं खेला जाता अंडर -19 वर्ल्ड कप, जानें 9 खास बातें
दूसरा, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे ने 2004 में हुए अंडर-19 वर्ल्ड कप में खेलने वाले खिलाड़ियों में से 11-11 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने का मौका दिया। यह भी एक रिकॉर्ड है जिसमें किसी टीम ने अपने 15 में से 11 क्रिकेटरों को राष्ट्रीय टीम में जगह दी।
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तीसरा, अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलकर कई टीमों के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय फलक पर दस्तक देने में कामयाब रहे हैं। लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने 2010 में खेले गए इस टूर्नामेंट से किसी भी खिलाड़ी को राष्ट्रीय टीम में नहीं लिया।