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जहां देवी सीता ने गुजारे थे अपने जीवन के खास पल
Thu, 12 Feb 2015 01:16 PM IST
Updated Thu, 12 Feb 2015 01:16 PM IST
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लक्ष्मी की अवतार देवी सीता के प्राकट्य को लेकर शास्त्रों में मतभेद है। कुछ स्थानों पर ऐसा उल्लेख मिलता है वैशाख शुक्ल नवमी को देवी सीता का प्राकट्य हुआ था। जबकि निर्णयसिंधु नामक पुस्तक के अनुसार देवी सीता का जन्म वैशाख कृष्ण अष्टमी को हुआ था। आज यही तिथि है। तो इस अवसर पर दर्शन कीजिए देवी सीता से संबंधित कुछ खास स्थानों के।
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सीतामढ़ी शहर से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर पुनौरा नामक स्थान है। यहां जानकी नाम से देवी सीता का मंदिर है। माना जाता है कि देवी सीता का जन्म इसी स्थान पर हुआ है। जनक की पुत्री होने के कारण देवी सीता जानकी भी कहलाती हैं।
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माना जाता है कि राजा जनक जब अपनी पत्नी के साथ हल चल रहे थे तब धरती से एक कलश प्राप्त हुआ जिससे देवी सीता प्राप्त हुई। जहां से यह कलश प्राप्त हुआ था अव बह स्थान सीता कुण्ड के नाम से जाना जाता है। पुनौरा धाम की इस तस्वीर में राजा जनक को हल चलाते हुए और साथ में सीता कुण्ड को आप देख सकते हैं।
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सीतामढ़ी शहर में देवी सीता का और भगवान राम का भव्य मंदिर है। इसे जानकी स्थान के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि पुनौरा में जब देवी सीता जनक को मिली तब सीता को लेकर जनक जी यहां पर आए थे। यहां रामनवमी एवं सीता नवमी के अवसर पर बहुत बड़ा मेला लगता है।
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राजा जनक की राजधानी जनकपुर थी जो आज नेपाल में है। यहां जानकी माता का एक भव्य मंदिर है। कहते हैं यह वही स्थान है जहां देवी सीता ने अपना बचपन गुजारा था। इस मंदिर में भगवान सीता के साथ भगवान राम और लक्ष्मण जी भी मौजूद हैं।
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