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चांद पर गांव बसाने की तैयारी में है ये इंसान!

Fri, 17 Jul 2015 03:20 PM IST
Updated Fri, 17 Jul 2015 03:20 PM IST
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चांद पर गांव बसाने की तैयारी में है ये इंसान!

Village and moon

बीबीसी के रिपोर्टर रिचर्ड होलिघंम ने यूरोपीय स्पेस एजेंस के महानिदेशके प्रोफेसर जोहान डीट्रिख वर्नर हाल से बातचीत की और जाना उनकी भविष्य की योजनाओं के बारें में। प्रोफ़ेसर जोहान डीट्रिख़ वर्नर हाल ही यूरोपीय स्पेस एजेंसी के महानिदेशक बने हैं। सालाना 4.4 अरब यूरो के बजट वाली स्पेस एजेंसी के महानिदेशक बनने से पहले वर्नर जर्मन स्पेस एजेंसी के मुखिया थे। लेकिन अब उनके काम का दायरा बहुत बड़ा हो गया है। यूरोप में निगरानी, मौसम, संचार, सेटेलाइटों की उड़ान, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के वैज्ञानिकों, मंगल, बुध और बृहस्पति के अभियान, इन सभी कामों की ज़िम्मेदारी उनकी है। जब रिचर्ड होलिघंम ने यूरोपीय स्पेस एजेंसी को लेकर उनकी योजनाओं के बारे में पूछा, तो मुझे उम्मीद नहीं थी कि वो ऐसा अप्रत्याशित जवाब देंगे।


पूरी रिपोर्ट-रिचर्ड होलिंघम/बीबीसी फ़्यूचर

चांद पर गांव बसाने की तैयारी में है ये इंसान!

Village and moon

उन्होंने चौंकाते हुए कहा, "हम अंतरिक्ष में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से आगे की योजना पर काम कर रहे हैं। हम पृथ्वी से कमतर ऑरबिट वाले क्षेत्र में माइक्रो ग्रेवेटी अनुसंधान के लिए छोटा स्पेसक्राफ्ट लगाने के बारे में सोच रहे हैं। इसके अलावा चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से पर एक गांव बनाने का प्रस्ताव भी रखा है।" चंद्रमा पर गांव विकसित करने की बात ही ऐसी है। कुछ ऐसा ही सपना अमरीकी स्पेस एजेंसी नासा ने 1960 के दशक से देखना शुरू किया था, लेकिन बाद में राजनीतिक तौर पर साथ नहीं मिलने से नासा ने अपने इस विचार को पीछे छोड़ दिया है।

चांद पर गांव बसाने की तैयारी में है ये इंसान!

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वर्नर कहते हैं, "चंद्रमा पर गांव का मतलब ये नहीं है कि कुछ घर, चर्च और टाउन हाल बनाए जाएंगे। यह गांव ऐसा होगा जिसमें सारी दुनिया की मदद से रोबोटिक और अंतरिक्षीय मिशन को बढ़ाया जाएगा और संचार के क्षेत्र में काम कर रहे सेटेलाइट की मदद से अलग-अलग तरह के प्रयोग किए जाएँगे। "अपने इस विचार के बारे में वर्नर कहते हैं, "चंद्रमा का दूरस्थ हिस्सा काफी दिलचस्प है। वहां से हम अंतरिक्ष में दूर तक टेलीस्कोप लगाकर जानकारियां पा सकते हैं। अमरीकी जल्दी ही मंगल तक जाने की सोच रहे हैं। हम ऐसा कैसे कर पाएंगे? मंगल पर जाने से पहले हमें वही प्रयोग चंद्रमा पर करने चाहिए।"

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मुश्किल है चुनौती-उदाहरण के लिए वर्नर बताते हैं कि नासा मंगल पर एक विशालकाय 3डी प्रिंटर वाल बेस बनाना चाहता है, यूरोपीय एजेंसी इसे चांद पर आज़मा सकती है। हालांकि अंतरिक्ष की किसी दुनिया में रहने की कल्पना बेहद मुश्किल चुनौती है, लेकिन अब अंतरिक्ष पृथ्वी से महज़ चार दिनों की दूरी पर स्थित है। वर्नर चंद्रमा पर अपने गांव की कल्पना में रूसी और चीनी अंतरिक्ष अभियान को भी शामिल कर सकते हैं। वर्नर कहते हैं, "हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करना होगा। बिना किसी रोकटोक के, जितने देश इस अभियान से जुड़ सकें...दुनिया के कई देशों के बीच आपसी समस्या है लेकिन अंतरिक्ष हमें एक साथ ला सकता है।"

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वर्नर आगे कहते हैं, "किसी भी देश को अलग रखना, सही तरीका नहीं है। बेहतर हल तो यह है कि पृथ्वी पर मानव समुदाय को एक साथ लाने के लिए अंतरिक्ष के प्रयोग में एक दूसरे का साथ देना चाहिए।" अमरीका ने चीनी अंतरिक्ष कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार किया था, जिसकी वर्नर ने भी आलोचना की है। अंतरिक्ष अनुसंधान पर होने वाले खर्च की भी काफी आलोचना होती रही है। इस आलोचना को ख़ारिज करते हुए वर्नर ने कहा, "अनुसंधान और उसके व्यावहारिक प्रयोग के बीच की दीवार नहीं होती। ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का मामला लीजिए जिसे आज हर कोई जान रहा है। इसकी जांच में सैटेलाइट इस्तेमाल किए जा रहे हैं। लेकिन इसकी खोज पृथ्वी पर नहीं हुई थी, बल्कि यह बुध अभियान के दौरान मालूम पड़ा था।"

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