पाक के 118 साल पुराने मंदिर में मंगलवार को पढ़ी जाती है नमाज
जब अंग्रेजों के चंगुल से हिंदुस्तां को आजादी दिलाने के लिए हिंदू और मुस्लिम आपस में मिलकर दुश्मनों से संघर्ष कर रहे थे तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक सरहद उन्हें आपस में बांट देगी। आजादी मिली और कुछ ऐसा हुआ कि दो मुल्क बन गए एक भारत और दूसरा पाकिस्तान। कई लोग भारत में आ गए तो कई लोग पाकिस्तान में ही रह गए। दोनों देशों में नफरतें फैलाने वाले लोग भी हैं तो दोनों देशों में अमन को अपने साथ लिए फिरने वाले लोग भी हैं।
पाक के 118 साल पुराने मंदिर में मंगलवार को पढ़ी जाती है नमाज
पाकिस्तान के रावलपिंडी की गलियों में सैकड़ों साल पुराने मंदिर कुछ ऐसी ही कहानी बयां करते हैं। अपने इतिहास को लेकर आगे बढ़ने वाले ये मंदिर आज वहां रहने वाले सिक्खों और हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं। पाकिस्तान के पत्रकार शईमुल तईमुर जब इन मंदिरों में गए तो उन्हें ऐसी सच्ची कहानियां पती चली जिन्हें जानकर आंखों में खुशी वाले आंसू आ जाते हैं जो बहने का नाम नहीं लेते बस। बस आंखों में यूहीं बने रहते हैं।
पाक के 118 साल पुराने मंदिर में मंगलवार को पढ़ी जाती है नमाज
रावलपिंडी की गलियों में ही सूजन सिंह की हवेली है। जब उस हवेली की छत पर जाते हैं तो रावलपिंडी में मौजूदा मंदिर दूर से ही दिखाई दे जाते हैं। रावलपिंडी की इन गालियों में अब घनी आबादी बस्ती है और छतों पर से यहां का नजारा कुछ अलग ही दिखाई देता है।
पाक के 118 साल पुराने मंदिर में मंगलवार को पढ़ी जाती है नमाज
जब शईमुल तईमुर इस मंदिरों के बारे में और जानने के लिए आगे बढ़े तो उनकी उत्सुकता लगातार बढ़ती ही जा रही थी। रेलवे स्टेशन से नजदीक स्थित कृष्ण भगवान के मंदिर तक जाने के लिए मुझे सदर बाजार से कबाड़ी बाजार तक गाड़ी चलाकर ले जानी पड़ी।
पाक के 118 साल पुराने मंदिर में मंगलवार को पढ़ी जाती है नमाज
इस मंदिर को वर्ष 1897 में बनाया गया था, इस मंदिर को कांजी मल, उजागर मल और राम राजपाल ने बनाया था। यह मंदिर दो मंजिल का है। इस मंदिर की शुरूआत में ही एक पेड़ पड़ता है जिसके पास एक शिव जी का पिंड है। इस मंदिर में एक नाम पट्टिका भी लगी है जिसमें इस मंदिर के लिए जिसने जमीन दी थी। उसका नाम लिखा हुआ है। यह मंदिर मुख्यत भगवान कृष्ण, भगवान गणेश, देवी शेरों वाली की पूजा की जाती है।