फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

...हिंदी अनुवाद कर दोहे और नजमों में लिख दी कुरान

Mon, 12 Oct 2015 11:47 AM IST
Updated Mon, 12 Oct 2015 11:47 AM IST
विज्ञापन

...हिंदी अनुवाद कर दोहे और नजमों में लिख दी कुरान

ravindra jain translate whole quran in hindi

अक्टूबर महीने में ही 9 तारीख को मशहूर संगीतकार और गायक रवींद्र जैन का आज निधन हो गया। उन्हें लकवा का जबर्दस्त आघात आया। कुछ दिनों तक अस्पताल में जिंदगी-मौत की लड़ाई लड़ने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। वह 71 वर्ष  के थे। उन्होंने अपने करियर में जिन शानदार फिल्मों में संगीत दिया उनमें चोर मचाए शोर (1974), गीत गाता चल (1975), चितचोर (1976) और अंखियों के झरोखे से जैसी फिल्मों में शानदार संगीत दिया। रवींद्र जैन ने कई गानों को गाया भी। रवींद्र जैन ने कई गाने लिखे भी।

...हिंदी अनुवाद कर दोहे और नजमों में लिख दी कुरान

ravindra jain translate whole quran in hindi

आगाज करता हूं कलामे पाक उसके नाम से, वो जो निहायत मेहरबां अल्लाह जिसका नाम है, भरपूर जो रहमत करे रहमान कहते हैं उसे, और जो रहीम उसका हमेशा रहम करना काम है।
आयत नंबर 1-2: तारीफ सारी जेब देती है फकत अल्लाह को, खालिक वही सारे जहां का पालने वाला वही, दर अस्ल रहमान-व-रहीम उसके सिफत के नाम हैं, बंदों का रखवाला वही अव्वल है वो आला वही।

...हिंदी अनुवाद कर दोहे और नजमों में लिख दी कुरान

ravindra jain translate whole quran in hindi

आयत नंबर 3: जिस रोज होंगे हश्र में नेकी बदी के फैसले, जिस रोज पूछा जाएगा सबसे हिसाब खैर व शर, उस रोज का मालिक है वो उस रोज का हाकिम है वो, उस रोज अपने ही किए का पाएगा फल हर बशर।
कुरान के आखिरी पारे में सूरे नास की आयतों का अनुवाद कुछ इस तरह है.......
आयत नंबर-5: जहन में ख्याल बद डाले जो वहम बढ़ाए सीनों में, वो जिसके नाम से दूर हटा मैं उसकी पनाह का तालिब हूं।
आयत नंबर-6: जिन्नात में या इंसानों में वो ख्वाह किसी मखलूक में हो, दे सबके शर से निजात दिला मैं उसकी पनाह का तालिब हूं।

विज्ञापन
विज्ञापन

...हिंदी अनुवाद कर दोहे और नजमों में लिख दी कुरान

ravindra jain translate whole quran in hindi

रविंद्र जैन जब 2009 और 2010 में बरेली आए तो उनकी बातों से साफ झलक रहा था कि वह सभी धर्मों के कद्रदाना और सम्मान करने वाले हैं। इसीलिए वह चाहते थे कि अनुवाद का एक-एक लब्ज सही हो। कहीं कोई कमी न रह जाए जिसके कारण मतलब बदले और कुरान के सम्मान पर आंच आ जाए। इन्हीं दोनों बार वह दरगाह आला हजरत और खानकाह नियाजिया गए। यहां के जिम्मेदारान से उन्होंने इसकी इस्लाह के लिए अनुरोध किया था। बाद में उन्होंने अपनी अनुवादित कुरान शब्बू मियां को सौंप दी थी कि वह आलिमों को दिखा कर उन्हें मंजरे आम पर लाने की इजाजत दे दें। खानकाह के प्रबंधक शब्बू मियां ने बताया कि वह लगातार इसके लिए कोशिश कर रहे थे। काफी चीजें देख ली गईं थीं और जल्द ही यह काम पूरा होने वाला था। इसके लिए लगातार उनके बातचीत भी होती रहती थी। वह चाहते थे कि इसको पूरा पढ़कर कोई एक प्रमाण पत्र के साथ इजाजत दे कि यह सही है। मगर अचानक उनका चला जाना सभी को झटका दे गया। इधर दरगाह आला हजरत के मौलाना शहाबउद्दीन का भी यही बताना है कि उनसे भी कुरान के अनुवाद में इस्लाह मांगी थी और वह इसको देखना भी चाहते थे।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed