कहीं पाक से लौटी गीता अलीगढ़ की डॉली तो नहीं..?
पाकिस्तान से अपने वतन लौटी गीता को लेकर एक दावेदारी अलीगढ़ की अतरौली तहसील के गांव ऊतरा से भी हुई है। ऊतरा गांव के निवासी बहाल सिंह के परिजनों ने दावा किया है कि गीता उनकी खोई हुई बेटी डॉली है, जो वर्ष 2000 से लापता है। (सभी फोटो और रिपोर्ट: अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़)
कहीं पाक से लौटी गीता अलीगढ़ की डॉली तो नहीं..?
डॉली के पिता बहाल सिंह का कहना है कि गीता और उनकी बेटी डॉली में तीन समानताएं है। दोनों मूक बधिर हैं, दोनो अनपढ़ हैं और दोनों के सात बहन भाई है। यही नहीं गीता का चेहरा और कद काठी भी उनकी बेटी से खासी मिलती जुलती है।
कहीं पाक से लौटी गीता अलीगढ़ की डॉली तो नहीं..?
डॉली के भाई होने की बात कह रहे नरेंद्र और उसके बड़े भाई गजेंद्र मंगलवार की सुबह नोएडा रवाना हो गए। उन्हें एक निजी टीवी चैनल ने वहां बुलाया था ताकि इस मामले की और तह तक पहुंचा जा सके। परिजनों का गीता से आमना-सामना होने पर शायद वह उन्हें पहचान ले। नरेंद्र ने बताया कि डॉली मूक बधिर है लेकिन इशारों में पूरी बात समझ सकती है और कह सकती है। पाकिस्तान से आई गीता से उसकी शक्ल काफी कुछ मिलती जुलती है। गीता को घर लाने के लिए वह डीएनए टेस्ट सहित कोई भी जांच-पड़ताल को तैयार है।
कहीं पाक से लौटी गीता अलीगढ़ की डॉली तो नहीं..?
नरेंद्र का कहना है कि 12 नवंबर 2000 की सुबह लापता हुई डाली की गुमशुदगी 21 नवंबर 2000 को थाना बरला में दर्ज है। इस सूचना में उसका नाम डॉली लिखा गया है, जबकि इश्तिहार में डबली नाम छप गया है। पुलिस को सूचना उनके पिता बहाल सिंह पुत्र घनश्याम सिंह की ओर से दी गई थी। जिसका थाना बरला का सीरीयल नंबर 814 है। (बहाल सिंह का घर)
कहीं पाक से लौटी गीता अलीगढ़ की डॉली तो नहीं..?
नरेंद्र की माने तो ऐसी ही एक सूचना उसी दौरान दिल्ली के थाना दरियागंज में भी दर्ज कराई गई है। पुराने दिनों को याद कर नरेंद्र ने बताया कि वह दो भाई और पांच बहनें हैं, जिसमें सुधा, ऊषा, सुमन, डॉली और रेनू बहनें हैं जबकि वह और गजेंद्र दो भाई है। डॉली से पहले ही गजेंद्र और नरेंद्र का जन्म हुआ।