काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?
साहित्यकार अनायास ही पुरस्कार नहीं लौटा रहे हैं। कर्नाटक और महाराष्ट्र ही नहीं, हिंदी क्षेत्र के लेखकों को भी धमकियां दी जा रही हैं। धमकी भरे फोन काल के चलते कथाकार डॉ. काशीनाथ सिंह तीन रात नहीं सो पाए थे। (अजय राय/अमर उजाला, वाराणसी)
काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?
पहले डॉ. सिंह ने इन फोन कालों को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन एमएम कलबुर्गी की हत्या के बाद उन्हें लगने लगा कि सुनियोजित ढंग से लेखकों से उनकी बोलने की आजादी छीनी जा रही है। इसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। काफी मंथन के बाद उन्होंने साहित्य अकादमी को पुरस्कार लौटा दिया।
काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?
डॉ. काशीनाथ सिंह का कृष्ण कथा पर आधारित उपन्यास ‘उपसंहार’ फरवरी 2014 में प्रकाशित हुआ। उसी साल सितंबर महीने में उनके पास धमकी वाली फोन कालें आने लगीं। रविवार को अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने बताया कि तीन दिनों तक हर घंटे के अंतराल पर फोन कालें आ रही थीं।
काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?
इन कालों के चक्कर में वे तीन रातों तक सो नहीं पाए। हारकर उन्होंने मोबाइल फोन एक हफ्ते के लिए बंद कर दिया। उन्होंने समझा कि स्थानीय साहित्यकार ही उन्हें तंग करने के लिए फोन करवा रहे हैं। उन्होंने पुलिस में इसकी शिकायत नहीं की, लेकिन साहित्यिक पत्रिका ‘तद्भव’ के संपादक और कथाकार अखिलेश से इसका साझा जरूर किया। उन्होंने सभी फोन नंबर अखिलेश को मुहैया कराए। अखिलेश ने नंबर को ट्रेस कराया तो पता चला कि गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, हरियाणा और पंजाब के नंबरों से ये कालें की गई थीं।
काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?
डॉ. सिंह ने बताया कि फोन करने वालों के स्वर अलग-अलग थे, लेकिन उनके सवाल एक जैसे ही होते थे। फोन करते ही पूछते थे, ‘काशीनाथ बोल रहे हो’, ‘तुम्ही ने उपसंहार लिखा है।’ उसके बाद कहते कि ‘तुमने कृष्ण पर क्यों लिखा, मुहम्मद साहब और ईसा मसीह पर क्यों नहीं लिखा।’ उनका लहजा धमकी देने वाला ही होता था। डॉ. सिंह ने बताया कि उनसे बातचीत से यही लगा कि उनमें से किसी ने उपन्यास नहीं पढ़ा था।