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तस्वीरें, पूरे जयपुर को 'घुमा' रही हैं ये पांच महिलाएं
Fri, 31 Jul 2015 04:53 PM IST
आभा शर्मा जयपुर से/ बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
आभा शर्मा जयपुर से/ बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
Updated Fri, 31 Jul 2015 04:53 PM IST
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राजस्थान सरकार के विभिन्न नौकरियों
में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के बाद से परंपरागत तौर
पर पुरुषों के माने जाने वाले पेशों में महिलाएं अपने हुनर दिखा रही हैं। इस
साल जून में शुरू हुई जयपुर मेट्रो के कुल 24 मेट्रो ऑपरेटरों में पांच
महिलाएं कुसुम, मोनिका, योगिता, ज्योति और मीना भी शामिल हैं।
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ये हैं कुसुम कंवर। इन्होंने बीबीसी को बताया, कि ''मेरी ख़ुशहाल ज़िंदगी की बुनियाद उस वक़्त बुरी तरह हिल गई जब मैंने दो साल पहले एक सड़क हादसे में अपने पति को खो दिया। वे
भवन निर्माण व्यवसाय से जुड़े थे. हम अपना एक सुन्दर घर बनाने का सोच
पाते, उससे पहले ही सब सपने ढह गए, अब मुझे अपनी डेढ़ साल की छोटी बच्ची
अन्वी की चिंता थी। जयपुर मेट्रो ऑपरेटर की नौकरी मिलने के बाद अब मेरी जीवन की गाड़ी धीरे-धीरे फिर से पटरी पर आई है। मेरी सबसे बड़ी ढाल बनीं मेरी माँ, जो मेरी बेटी को अपने साथ रखती हैं ताकि मैं अपना करियर बना सकूँ।''
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ज्योतिरानी खंडेलवाल, बीकानेर से हैं। इन्होंने बताया कि ''मुझे सबसे ज़्यादा ख़ुशी तो इसी बात की है कि
मैंने अपना पारिवारिक पेशा अपनाया है। मेरे दादा लोको पायलट थे, पिता, ताऊ
और ननिहाल में भी बहुत से लोग रेलवे की नौकरी में हैं. इसलिए मुझे बहुत ही
अच्छा लग रहा है। वैसे ऐसा कभी सोचा नहीं था कि रेलवे की नौकरी करुँगी. मेट्रो ड्राईवर बनना तो बस बाय लक, बाय चांस हो गया।
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योगिता तिवारी कहती हैं कि ''जब हम प्लेटफ़ार्म पर एंट्री करते हैं तो लोग थोड़े चकित होकर देखते हैं, अरे लड़कियां मेट्रो चला रही हैं।'' एक बार जब मैं कैब से उतरकर आ रही थी तो एक बच्ची ने कहा “मम्मा मैं भी बनूगीं मेट्रो ड्राईवर।” यदि कोई आपके जैसा बनना चाह रहा है ये देखकर बहुत अच्छा लगता है। ऐसा
कोई काम नहीं है जो महिलाएं नहीं कर सकतीं।
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मोनिका मित्तल, कोटपुतली से हैं। इन्होंने अभी तक सिर्फ़ फोर व्हीलर ही चलाया था उससे भारी कुछ नहीं। मेरा
भाई बोलता था कि देख तू कहीं ठोक देगी. चलाने नहीं देता था। कार बड़ी
मुश्किल से देता था. देता नहीं था तो ज़िद्द करके लेनी पड़ती थी। अब यहाँ
तो कोई रोकटोक है नहीं। वो आया था और मुझे मेट्रो चलाते देखकर बहुत
ख़ुश हुआ। मजाक में कहने भी लगा कि मुझे भी चलाने देगी मेट्रो? और मैंने
कहा बिलकुल नहीं।
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