गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव परिणामों की ये रहीं 10 खास बातें
राजकोट जिले के भाजपा अध्यक्ष नगदान छावड़ा जो चुनावों पर लगातार अपनी निगाह गड़ाए हुए थे। यही नहीं पोलिंग बूथों पर उन्होंने बाउंसर तक लगा रखे थे। वो भी चुनाव हार गए।
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव परिणामों की ये रहीं 10 खास बातें
इस चुनाव में एक पति अपनी ही पत्नी के हाथों मात खा गया। राज्य के वलसाड़ जिले में कलवाड़ा तालुका पंचायत में उन्होंने अपने पति हरीश को हरा दिया। जय श्री कांग्रेस की उम्मीदवार थी और दोनों के बीच तलाक का मुकदमा बीते 9 साल से चल रहा है।
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कांग्रेस ने घर-घर की कहानी यानी सास बहु के झगड़े को राजनीति की दहलीज तक लाने में सफल रही । खादाधर तालुका पंचायत से कांग्रस ने 60 वर्षीय शांतुबेन को उनकी बहु 34 वर्षीय हीरेबेन के खिलाफ खड़ा किया जिसमें वो 97 मतों से जीत गईं।
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इतना ही नहीं पाटीदार हलचल भी कांग्रेस के लिए कुछ खास कामगर साबित नहीं हुआ। बापूनगर से भारत कॉलोनी से सटी सभी सीटे जहां पाटीदार समाज के लोग थे, वहां तो प्रभाव दिख रहा था। इसी प्रभाव के चलते इस वार्ड की सारी 4 सीटें कांग्रेस के पास गईं लेकिन अन्य किसी भी पाटीदार बहुल क्षेत्र से भाजपा के खिलाफ वोट नहीं गया।
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पटेल आरक्षण आंदोलन के सहारे हार्दिक पटेल गुजरात की राजनीति में तेजी से ऊभरे थे लेकिन उनका जादू उन्हीं के विरमगाम में नहीं चल पाया और इस तालुका पंचायत में कांग्रेस और भाजपा ने बराबर की सीटें निकाली।