गजब है बोझा ढोने वाली इन बूढ़ी महिलाओं की कहानी
गोवा के दक्षिणी शहर मडगांव में महिलाएं ढुलाई का काम करती हैं। इन्हें भदेल कहते हैं। ये महिलाएं इस पेशे में कई पीढ़ियों से हैं। इनमें अधिकांश की मां या सास भी यही काम किया करती थीं। आगे देखें कुली के तौर पर इन महिलाओं का कैसा है जीवन। (सभी फोटो बीबीसी से)
गजब है बोझा ढोने वाली इन बूढ़ी महिलाओं की कहानी
मडगांव बाज़ार में अब बहुत कम संख्या में ही भदेल रह गई हैं, लगभग एक
दर्जन। इन सभी की उम्र 50 साल के आस पास है। अगली पीढ़ी से किसी ने भी इस
पेशे को नहीं अपनाया। मारिया बोर्गीज कहती हैं, "इस काम में हमारी
लड़कियों की कोई रुचि नहीं है। वे कुछ पढ़ लिख गई हैं इसलिए ऑफ़िस में काम
करना चाहती हैं."
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ये महिलाएं सुबह के घरेलू काम निपटा कर, पास के गांवों से बसों में यहां
आती हैं. ये सुबह आठ से 10 बजे के बीच आती हैं और शाम 6.30 बजे तक यहां
काम करती हैं।भदेल कुनबिस जनजाति की हैं, जिन्हें गोवा का मूल निवासी माना जाता है।
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एपाइन आलमीडा बिल्कुल कुनबि स्टाइल के पोशाक पहने हुए हैं। हालांकि कपड़े
और उनके रंग पारम्परिक इस्तेमाल किए जाने वाले कपड़ों से अलग हैं, क्योंकि
ऐसे कपड़े अब नहीं बुने जाते।
गजब है बोझा ढोने वाली इन बूढ़ी महिलाओं की कहानी
ये भदेल महिलाएं मडगांव बाज़ार में गोदामों और दुकानों पर काम करती हैं.
ऐसा माना जाता है कि अतीत में गोवा के अन्य बाजारों में भी ये काम करती
थीं, लेकिन इसके साक्ष्य बहुत कम हैं, जिनका लोकगीतों में जिक्र मिलता है। जिन
लोगों को उनकी सेवाओं की जरूरत होती है, वो जानते हैं कि भदेल कहां
मिलेंगी, यानी, मडगांव बाजार में दुकानों की क़तार में एक पुरानी दुकान के
सामने।