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उस 'आजाद' को नमन, जिसके नाम से कांपती थी ब्रिटिश हुकूमत

Thu, 23 Jul 2015 12:58 PM IST
Updated Thu, 23 Jul 2015 12:58 PM IST
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उस 'आजाद' को नमन, जिसके नाम से कांपती थी ब्रिटिश हुकूमत

chandra shekhar azad birth anniversary

आजादी की लड़ाई का वह योद्धा जो कभी अंग्रेजों से नहीं डरा, जिसके नाम से ही ब्रिटिश सरकार थर-थर कांपती थी, जिसने अपनी पूरी जवानी देश के नाम कर दी, उस अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की आज जयंती है।

उस 'आजाद' को नमन, जिसके नाम से कांपती थी ब्रिटिश हुकूमत

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23 जुलाई 1906 को जन्मे आजाद 17 साल की उम्र में ही क्रांतिकारी संगठन 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ में शामिल हो गए थे। देश के लिए उनके जोश और जज्बे को देखकर संगठन में दूसरे क्रांतिकारी उन्हें ‘क्विक सिल्वर’ (पारा) नाम से बुलाते थे।

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क्रांतिकारियों के संगठन 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ में धन की बेहद कमी थी इसलिए संगठन के लिए धन इकट्ठा करने की जिम्मेदारी भी चंद्रशेखर आजाद को ही दी गई थी।

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संगठन के लिए चंद्रशेखर आजाद कितने संजीदा थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संगठन में धन की कमी के कारण सर्दियों में भी वे केवल पुराने अखबार बिछाकर जमीन पर सोते थे।

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चंद्रशेकर आजाद वेश बदलने में बहुत माहिर थे। कई बार क्रांतिकारी घटनाओं को अंजाम देने के बाद आजाद वेश बदलकर पुलिस के सामने से निकल जाते थे और कोई उन्हें पहचान तक नहीं पाता था।

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