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रेलवे कुली बना मायानगरी का तीसरा डॉन, जानिए कैसे?

Fri, 27 Nov 2015 06:52 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 27 Nov 2015 06:52 PM IST
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रेलवे कुली बना मायानगरी का तीसरा डॉन, जानिए कैसे?

when a porter became mumbai's third don

सिर पर सैलानियों के सामान का बोझ ढोने वाला एक दिन मुंबई का तीसरा बड़ा डॉन बन जाएगा, किसी को अंदाजा नहीं था। तस्वीरों में दास्तां।

रेलवे कुली बना मायानगरी का तीसरा डॉन, जानिए कैसे?

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साठ के दशक में जब समंदर की सुर्ख लहरों पर सवार कार्गो जहाज हाजी मस्तान के इशारों से हरकत करते थे और साउथ सेंट्रल मुंबई में करीम लाला ही कानून और अदालत हो चले थे, तब मायानगरी के उत्तर-पूर्व इलाके में एक नए डॉन ने दस्तक दे दी थी। जिसे दुनिया ने वरदा भाई के नाम से जाना।

रेलवे कुली बना मायानगरी का तीसरा डॉन, जानिए कैसे?

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मूल रूप से चेन्नई के थूथुकुडी के वरदराजन मुनिस्वामी मुदलियार ने उम्र के 34वें साल में जब मुंबई का रुख किया तो शुरुआती दिनों में वीटी स्टेशन पर कुली बनकर गुजर-बसर की।

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वीटी स्टेशन पर मद्रासी कुली को देख किसी को अंदाजा नहीं था कि जो हाथ बोझ उठा रहे हैं, वही एकदिन लोगों को दुनिया से उठाने लगेंगे।

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रेलवे कुली बना मायानगरी का तीसरा डॉन, जानिए कैसे?

when a porter became mumbai's third don

कमरतोड़ मेहनत के बाद भी मुफलिसी की मार ने वरदा को गुनाहों के रास्ते पर ला दिया। अवैध शराब की तस्करी से शुरा हुआ सफर कत्ल-ओ-गारत पर उतर आया। सुपारी लेकर हत्याएं करना, जुएं और शराब के अड्डे चलाना, ड्रग्स-सोने की तस्करी करना वरदा का पेशा गया।

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