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साल 2015 में खूब छाए रहे ये 15 मुद्दे, जानें वजह
Tue, 29 Dec 2015 11:40 AM IST
Updated Tue, 29 Dec 2015 11:40 AM IST
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साल 2015 में खूब छाए रहे ये 15 मुद्दे, जानें वजह
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ऐसी कौन सी चीजें थी जिन्होंने 2015 में अपने पांव देश में ऐसे जमाए कि हर आम और खास उनकी चर्चा करता नजर आया? ये विषय सोशल मीडिया पर भी छाए रहे।
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असहिष्णुता
सबसे पहले इस लिस्ट में नाम आता है 'असहिष्णुता'। ये शब्द ऐसा छाया कि हर किसी ने इसके बारे में बात की। इस साल सितंबर के महीने में उत्तर प्रदेश में दादरी के पास बिसाहड़ा गांव में देर रात लोगों के हुजूम ने एक मुसलमान, मोहम्मद अखलाक को गोमांस खाने की अफवाह पर मार डाला। इस मामले ने देश में असहिष्णुता को लेकर बहस छेड़ दी। लोगों में बढ़ती असहिष्णुता का असर साहित्यकारों पर भी दिखा और उन्होंने अपना विरोध दर्ज करवाते हुए अवार्ड-वापसी भी शुरू कर दी। दोनों सदनों से लेकर सोशल मीडिया, हर जगह 'असहिष्णुता' ही छाया रहा।
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भक्त
दूसरा नाम जो लोगों के जिंदगियों में सिर चढ़ कर बोला वो था 'भक्त'। सोशल मीडिया में #bhakt शब्द तब वायरल हुआ जब हिंदुत्व के पक्ष में बोलने वाले आक्रामक फैंस ने सोशल मीडिया पर ही भारतीय जनता पार्टी और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सच्चे सपोर्टर बनकर दिखे। इसके बाद से तो लोगों ने भक्त शब्द को इतना भुनाया कि आम जिंदगी में भी किसी को किसी का मुरीद होने की वजह से भक्त करार दे दिया।
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क्रिकेट में पिंक बॉल
क्रिकेट में नए प्रयोग के लिए साल 2015 को भी याद किया जाएगा। कई सालों की मशक्कत के बाद 138 साल पुराने टेस्ट इतिहास में पहली बार रेड बॉल (लाल गेंद) की जगह पिंक बॉल का प्रयोग शुरू किया गया। पिंक बॉल के जरिए 27 नवंबर को पहला टेस्ट मैच एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया। पहला पिंक बॉल खेलने का श्रेय मिला न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल को।
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दिन-रात का टेस्ट मैच
पिंक बॉल के साथ-साथ क्रिकेट के सबसे पुराने प्रारूप टेस्ट की लोकप्रियता बनाए रखने के लिए आईसीसी ने 2015 में एक और नया प्रयोग किया। वनडे और टी-20 के बाद पहली बार कोई टेस्ट मैच दूधिया रोशनी यानी दिन-रात में खेला गया। पिंक बॉल के साथ-साथ दूधिया रोशनी से टेस्ट को देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक स्टेडियम पहुंचे।
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