Parenting Tips: बढ़ती उम्र में बच्चों की जिंदगी में काफी बदलाव आते हैं, जिसका असर उनके दिल और दिमाग दोनों पर पड़ता है। बच्चे इस दौरान वही सीखते हैं, जैसा व्यवहार उनके आस-पास के लोग करते हैं। इसीलिए तो कहा जाता है कि बच्चे के सामने हमेशा सोच-समझ के बात करनी चाहिए। उन्हें ऐसी किसी जगह नहीं भेजना चाहिए, जहां का माहौल खराब हो। क्योंकि कई बार खराब माहौल के असर में बच्चे भी गलत चीजें सीख जाते हैं।
इन चीजों में सबसे पहले आता है गाली देना। आज के समय में युवाओं के बीच कई जगहों पर गाली देना कूल बनने की निशानी माना जाता है। ऐसे में यदि आपका बच्चा भी गाली देना सीख रहा है तो उसे मारपीट कर सुधारने की जरूरत नहीं है। आप कुछ आसान टिप्स को अपनाकर भी उसे सुधार सकते हैं। आइए आपको इस बारे में बताते हैं।
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ये सवाल है जरूरी
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ये सवाल है जरूरी
यदि आपका बच्चा गाली दे रहा है तो आपको अपने बच्चे से एक सवाल अवश्य पूछना है। उससे आराम से पूछें कि 'तुमने यह कहां सुना? क्योंकि ये जानना सबसे जरूरी है कि बच्चे ने गाली देना कहां से सीखा। यदि उसने कहीं घर पर ही गाली सुनी है तो आपको घर पर ध्यान देने की जरूरत है। ताकि ऐसा दोबारा न हो।
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प्यार से समझाएं
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प्यार से समझाएं
कभी भी बच्चे के मुंह से गाली सुनने के बाद तुरंत रिएक्ट करके उसे मारे नहीं। बल्कि उसके साथ बैठें और उसे समझाएं। बच्चे को प्यार से समझाएं कि जो भी शब्द उन्होंने बोला है वो गलत है और इसका इस्तेमाल कभी नहीं किया जा सकता। क्योंकि कई बार बच्चे बिना मतलब जाने ही गालियां बोलते हैं, तो उन्हें समझाना जरूरी है कि ये शब्द काफी गलत है।
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गुस्से में इस्तेमाल करने वाले शब्दों का विकल्प दें
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गुस्से में इस्तेमाल करने वाले शब्दों का विकल्प दें
यदि आपके बच्चे ने गुस्से में गाली दी है, और उसका कहना है कि गुस्से में उसके मुंह से गाली निकल गई, तब आपको उसे ये समझाना जरूरी है कि वो बिना गाली दिए भी अपने गुस्से को जाहिर कर सकता है। छोटे बच्चों को इतना शब्दों का ज्ञान नहीं होता है। इसलिए उन्हें सही शब्दों का विकल्प दें, ताकि बच्चे सही शब्दों का इस्तेमाल करके गुस्सा व्यक्त कर सकें।
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समय दें
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समय दें
कभी भी बच्चों से तुरंत सुधरने की उम्मीद न करें। इसके लिए आपको इंतजार करना पड़ सकता है। बच्चे को इस टॉपिक पर बार-बार समझाएं ताकि उन्हें सही से समझ आए। अगर वो बार-बार गाली दे रहा है तो उन्हें समझाएं कि गाली देने बच्चे अच्छे नहीं होते। चाहें तो थोड़ा सा डरा सकते हैं, लेकिन हाथ न उठाएं, इससे बच्चे की मेंटल हेल्थ पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।