संगीत के जादूगर और 'मोजार्ट ऑफ मद्रास' के नाम से मशहूर संगीतकार एआर रहमान आज अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। दक्षिण भारत में मद्रास के एक हिन्दू परिवार में जन्मे रहमान ने अपनी जादुई आवाज से पूरी दुनिया को अपना कायल बना दिया। सीधे-साधे संगीत के इस जादूगर ने जब प्यार की दुनिया में कदम रखा तो पहले ही होने वाली पत्नी सायरा बानो के सामने एक शर्त रख दी थी। जिसका जिक्र कई बार सायरा बानो अपने कई इंटरव्यू में भी कर चुकी हैं। आइए आज इस खास मौके पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी ही अनसुनी बातें।
तमिल से लेकर हिंदी और फिर हॉलीवुड तक में अपना हुनर दिखाने वाले रहमान एक समय में इंजीनियर बनने की ख्वाहिश रखते थे। उनका जन्म 6 जनवरी, 1967 में हुआ। रहमान का बचपन का नाम दिलीप कुमार था, हालांकि उन्हें यह नाम कभी भी पसंद नहीं रहा।
रहमान के पिता आर.के. शेखर तमिल और मलयालम फिल्मों में स्कोर कंपोजर थे, दिलीप अपने पिता के साथ म्युजिक स्टूडियो में उनका हाथ बंटाया करते थे।लेकिन महज 9 साल की उम्र में रहमान के पिता की मत्यु हो गई। पिता की मौत के बाद मां ने रहमान को पाल-पोस कर बड़ा किया। साल 1984 में बहन की बीमारी के समय उनकी मुलाकात एक सूफी संत कादरी तारिक से हुई। साल 1989 में 23 साल की उम्र में इन्होनें इस्लाम धर्म अपना लिया और एक हिन्दू ज्योतिषी ने इन्हें अल्लाह रखा रहमान नाम दिया।
रहमान के पिता की मृत्यु के बाद घर खर्च चलाने के लिए उनकी मां, पिता के वाद्य यंत्रों को किराए पर देती थीं। दुनियाभर के इन यंत्रों को चलाना सिर्फ रहमान को ही आता था, इसलिए वे यंत्रों के साथ जाते थे। 25 साल की उम्र में रहमान खुद को बेहद असफल मानते थे और रोज आत्महत्या के बारे में सोचते थे।
रहमान की शादी उनके घरवालों की मर्जी से हुई। उन्होंने अपनी होने वाली पत्नी सायरा बानो के सामने पहली मुलाकात में ही एक अनोखी शर्त रख दी थी। उन्होंने अपनी पत्नी कहा था, 'अगर हम डिनर कर रहे होंगे और मुझे कोई धुन सूझेगी, तो हमें डिनर छोड़ना होगा।' इस बारे में उनकी पत्नी कहती हैं कि रहमान ने उन्हें शादी से पहले ही 'ऑटो-ट्यून' कर दिया था।