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मदर्स डे 2019: ऐसे हुई थी मां को सम्मान देने वाले इस दिन की शुरुआत, जानें इसका इतिहास
Sat, 11 May 2019 01:02 PM IST
पंखुड़ी सिंह
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Sat, 11 May 2019 01:02 PM IST
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विश्व भर में 12 मई को मदर्स डे मनाया जाएगा। यूं तो हर दिन मां के नाम ही होता है लेकिन आज के व्यस्त लाइफस्टाइल में अपनी मां को ज्यादा समय नहीं दे पाते हैं। अपनी हर तकलीफें एक ओर करके बच्चों की हर खुशी के ध्यान रखने वाली मां के साथ ये खास दिन बिताएं। ऐसे में मदर्स डे लोगों को अपनी भावनाओं को जाहिर करने का मौका जरूर दे देता है। मदर्स डे ज्यादातर देशों में मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। लेकिन कई देशों में अलग-अलग तारीख पर भी मनाया जाता है। जानिए कैसे हुई इस दिन की शुरुआत।
एेसे हुई मदर्स डे की शुरुआत
मदर्स डे को लेकर कई मान्यताएं हैं। कुछ का मानना है कि मदर्स डे के इस खास दिन की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। वर्जिनिया में एना जार्विस नाम की महिला ने मदर्स डे की शुरुआत की। कहा जाता है कि एना अपनी मां से बहुत प्यार करती थीं और उनसे बहुत प्रेरित थीं। उन्होंने कभी शादी नहीं की और मां का निधन हो जाने के बाद उन्होंने उनके प्रति सम्मान दिखाने के लिए इस खास दिन की शुरुआत की। ईसाई समुदाय के लोग इस दिन को वर्जिन मेरी का दिन मानते हैं। यूरोप और ब्रिटेन में मदरिंग संडे भी मनाया जाता है।
मदर्स डे को लेकर कई मान्यताएं हैं। कुछ का मानना है कि मदर्स डे के इस खास दिन की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। वर्जिनिया में एना जार्विस नाम की महिला ने मदर्स डे की शुरुआत की। कहा जाता है कि एना अपनी मां से बहुत प्यार करती थीं और उनसे बहुत प्रेरित थीं। उन्होंने कभी शादी नहीं की और मां का निधन हो जाने के बाद उन्होंने उनके प्रति सम्मान दिखाने के लिए इस खास दिन की शुरुआत की। ईसाई समुदाय के लोग इस दिन को वर्जिन मेरी का दिन मानते हैं। यूरोप और ब्रिटेन में मदरिंग संडे भी मनाया जाता है।
इससे जुड़ी एक और कहानी है जिसके अनुसार, मदर्स डे की शुरुआत ग्रीस से हुई थी। ग्रीस के लोग अपनी मां का बहुत सम्मान करते हैं। इसलिए वो इस दिन उनकी पूजा करते थे। मान्यताओं के अनुसार, स्यबेसे ग्रीक देवताओं की माता थीं और मदर्स डे पर लोग उनकी पूजा करते थे।
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इस वर्ष मदर्स डे 2019 की थीम है बैलेंस फॉर बेटर (#balanceforbetter)। इस थीम का मुख्य उद्देश्य विश्व में जेंडर बैलेंस यानी लिंग संतुलन बनाए रखना है। मां का सभी के जीवन में योगदान अतुलनीय है। फिर चाहे उसे ऑफिस और घर दोनों जगह में संतुलन क्यों ना बैठना पड़ा हो, मां ने कभी भी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा है।
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9 मई 1914 को अमेरिकी प्रेसिडेंट वुड्रो विल्सन ने एक कानून पारित किया था। इस कानून में लिखा था कि मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाएगा। इसी के बाद से भारत समेत कई देशों में ये खास दिन मई के दूसरे रविवार को मनाया जाने लगा। तो इस मदर्स डे के खास मौके पर अपनी मां के साथ समय बिताएं, वो सब करें जो व्यस्त होने के कारण आप नहीं कर पाते और मां को खास तोहफे देकर जरूर खुश करें।