30 अप्रैल को पूरी दुनिया में जैज़ डे मनाया जाता है। जैज़ एक पश्चिमी सभ्यता की संगीत विधा है। जिसे पूरी दुनिया में पसंद किया जाता है। अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में इसकी लोकप्रियता बहुत ज्यादा है। इस संगीत विधा का सबसे अहम इंस्ट्रूमेंट सक्सोफोन है ।यूनेस्को ने साल 2011 में एक खास दिन जैज़ डे के रूप में मनाने का फैसला लिया। जिसका उद्देश्य इस संगीत विधा की खासियत बताना था और ये भी कि कैसे ये पूरी दुनिया को एकता के सूत्र में पिरो सकता है।
International Jazz Day 2020: संगीत प्रेमियों के लिए बेहद खास है ये दिन, जानिए क्यों मनाया जाता है?
जैज़ डे पर सभी समुदाय, स्कूल और दुनियाभर के कलाकार एक साथ इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं। हर साल इस दिन पूरी दुनिया में समारोह आयोजित किए जाते हैं और ये दिन संगीत प्रेमियों के लिए खास बन जाता है। लेकिन इस साल पूरी दुनिया में फैले कोरोना महामारी के कारण ऑनलाइन ही सेलिब्रेट किया जाएगा। जैज़ की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रोग्राम का आयोजन किया जाएगा जिसमें दुनियाभर के कलाकार शामिल होंगे। यहीं नहीं वर्चुअल वर्ल्ड पर जैज़ के बारे में फ्री क्लासेज भी चलाई जाएंगी।
जैज़ जैसी संगीत की विधा भावनाओं को व्यक्त करने की छूट देती है। जिसकी मदद से लोग एक दूसरे के करीब आ सके और मन में होने वाले बैरभाव को दूर किया जा सके। दुनियाभर में सांप्रदायिक सौहाद्र को बढ़ावा देने के लिये भी इस दिन का महत्व है। इसके साथ ही जैज़ संगीत की नई विधाओं को अपने में शामिल करती है। हर कलाकार अपनी प्रतिभा को उकेरते हुए चाहे तो किसी नए विधा को जन्म दे सकता है। जिसे जैज़ प्रोत्साहित करती है और उसे अपने डांस फार्म में जगह देती है।
यूनेस्को के गुडविल अम्बेस्डर हार्बी हैनकॉक जिन्होंने इस दिन को शुरू किया था। कहते हैं कि पहले से कहीं अधिक, एक साथ मिलकर गाते हैं और जैज़ की भावनाओं को दुनियाभर में फैलाते हैं और ये कोशिश करते हैं कि इस आइसोलेशन और अनिश्चितता के समय में लोग एक दूसरे से फिर से जुड़ सकें।
भले ही जैज़ डे का उद्देश्य इस संगीत की विधा को पूरी दुनिया में फैलाना था लेकिन इसका अहम रोल पूरी दुनिया के युवाओं को एक साथ लाना है।