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Mental Health Day: गंभीर डिप्रेशन में सबसे कारगर है ECT थेरपी, खर्च कम-परिणाम बेहतर, फिर इसे लेकर भ्रम क्यों?

Abhilash Srivastava अभिलाष श्रीवास्तव
Updated Mon, 10 Oct 2022 12:08 AM IST
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World Meantal Health Day2022, Electroconvulsive therapy (ECT) for severe depression know its procedure
गंभीर डिप्रेशन के लिए क्या किया जाना चाहिए? - फोटो : istock

मानसिक स्वास्थ्य मौजूदा समय की प्राथमिकता भी है और इससे संबंधित विकार बड़ी चुनौती भी। पिछले कुछ वर्षों में मनोरोगों के मामलों में तेजी से उछाल देखा गया है, विशेषकर कोरोना महामारी के बाद से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के ग्राफ में बड़ी स्पाइक देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस महामरी के कारण जिस तरह के माहौल बने, और  इससे उत्पन्न परिस्थितियों ने जिस प्रकार से लोगों की मनोस्थिति को प्रभावित किया है, ऐसे में आने वाले वर्षों में इसके आंकड़े और भी बढ़ने की आशंका है। डॉक्टर्स का कहना है कि इस खतरे को ध्यान में रखते हुए हर उम्र के लोगों को मानसिक स्वास्थ्य को लेकर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। इसके लक्षणों को नजरअंदाज करना बड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है।



वैश्विक स्तर पर बढ़ रही मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में लोगों को जागरूक करने और इस बढ़ते खतरे को कम करने के लिए हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस लेख में हम उस रामबाण थेरपी के बारे में जानेंगे जिसे मनोरोग विशेषज्ञ गंभीर अवसाद और आत्महत्या के विचारों जैसी मनोस्थिति को ठीक करने में सबसे प्रभावी मानते आ रहे हैं।

हालांकि दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इस थेरेपी को लेकर लोगों के मन में कई प्रकार के मिथ्स हैं, जिसके कारण समय के साथ यह प्रभावी थेरेपी उपचार प्रक्रियाओं से हटती जा रही है। आइए इस बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।

World Meantal Health Day2022, Electroconvulsive therapy (ECT) for severe depression know its procedure
इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी से अवसाद का इलाज - फोटो : istock

इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी के बारे में जानिए


गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए जिस प्रभावी उपचार विधि की बात की जा रही है वह है- ईसीटी थेरेपी। ईसीटी यानी कि इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी को लंबे समय से गंभीर अवसाद और बाइपोलर डिसऑर्डर के प्रभावी इलाज के तौर पर प्रयोग में लाया जाता रहा है। ईसीटी के दौरान एनेस्थीसिया के साथ रोगी के मस्तिष्क में इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन यानी कि  विद्युत उत्तेजना दी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ रोगियों में यह इतनी प्रभावी है कि एक-दो सेशन में ही गंभीर अवसाद के लक्षणों को बिल्कुल कम होते देखा गया है। 

हालांकि ईसीटी को लेकर लोगों के मन में कई प्रकार के डर और मिथ्स हैं, आइए इस बारे में विशेषज्ञ से समझते हैं।

World Meantal Health Day2022, Electroconvulsive therapy (ECT) for severe depression know its procedure
गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में ईसीटी के लाभ - फोटो : istock

क्या कहते हैं मनोरोग विशेषज्ञ?

ईसीटी के बारे में समझने और इसकी प्रभाविकता को जानने के लिए हमने इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज (इहबास) दिल्ली में मनोचिकित्सा के प्रोफेसर डॉ ओमप्रकाश से संपर्क किया। डॉ ओमप्रकाश बताते हैं, शोध और अनुभव दोनों के आधार पर कहा जा सकता है कि गंभीर अवसाद और आत्महत्या के विचारों से परेशान लोगों को जल्द से जल्द आराम दिलाने में ईसीटी अत्यधिक प्रभावी है।

नैदानिक साक्ष्य बताते हैं कि गंभीर डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर और सिजोफ्रेनिया के शिकार लोगों को ईसीटी से जल्द और दीर्घकालिक आराम मिल सकता है। कैटेटोनिया वाले रोगियों में भी ईसीटी से लाभ देखा गया है। कैटेटोनिया में रोगी बहुत अधिक उत्तेजित होकर खुद को गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकता है।

डॉ ओमप्रकाश कहते हैं, गंभीर डिप्रेशन या आत्महत्या के विचारों से परेशान रोगियों को त्वरित उपचार की आवश्यकता होती है, इसमें दवाइयों के असर करने या अन्य थेरेपी के प्रभाव तक का इंतजार नहीं किया जा सकता है, ऐसे मामलों में ईसीटी से जल्द आराम पाया जा सकता है। आत्महत्या के प्रयास वाले लोगों के फिर से प्रयास की आशंका अधिक होती है, इस थेरपी के माध्यम से इस जोखिम को भी कम किया जा सकता है। हालांकि अफसोसजनक यह है कि लोगों के मन में ईसीटी को लेकर कई प्रकार के मिथ्स और डर हैं, जिसको दूर किया जाना बहुत आवश्यक है। 

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World Meantal Health Day2022, Electroconvulsive therapy (ECT) for severe depression know its procedure
ईसीटी थेरेपी से गंभीर अवसाद में मिलता है लाभ - फोटो : istock

ईसीटी को लेकर डर क्यों है?

डॉ ओमप्रकाश कहते हैं, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर समाज में बड़ी स्टिग्मा है। ईसीटी जैसे प्रभावी उपचार माध्यमों के प्रयोग में आती कमी के लिए भी इसी स्टिग्मा को एक कारण माना जा सकता है। ईसीटी में रोगी के मस्तिष्क में विशेष उपकरणों की मदद से विद्युत उत्तेजना बढ़ाई जाती है। फिल्मों में इस थेरपी का इतना गलत चित्रण किया गया है जिसने लोगों में इस प्रभावी थेरेपी को लेकर डर बना दिया है, जबकि असलियत बिल्कुल अलग है।

फिल्मों में जिस तरह से दिखाया जाता है कि ईसीटी काफी दर्दकारक है,रोगी छटपटाता है, लोग उसे पकड़कर रखते हैं, वास्तविकता में ऐसे कुछ भी नहीं है। इस तरह के भ्रम के कारण ईसीटी जैसी प्रभावी थेरपी से लोग दूर भागते हैं। इसकी प्रक्रिया और प्रभावों के बारे में जानना बहुत आवश्यक है।


ईसीटी कैसे दी जाती है?

जिस तरह से फिल्मों में दिखाया जाता है, उससे बिल्कुल अलग ईसीटी प्रशिक्षित विशेषज्ञों की निगरानी में रोगी को एनस्थीसिया देकर की जाने वाली प्रक्रिया है, जिसमें बहुत निम्न स्तर का एहसास होता है। ईसीटी उपचार के पहले रोगी की कई स्तर पर जांच की जाती है। उपचार के समय मरीज को जनरल एनस्थीसिया दी जाती है। खोपड़ी पर मसल रिलैक्सेंट और  इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जिसके माध्यम से  रोगी का मस्तिष्क उत्तेजित होता है। नियंत्रित रूप से प्रशिक्षित पेशेवर इलेक्ट्रिकल प्लसेज के माध्यम से शॉक देते हैं, जिससे मस्तिष्क की उत्तेजना बढ़ाई जाती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात इस प्रक्रिया के दौरान रोगी अचेतन अवस्था में होता है और 5-10 मिनट के बाद जाग जाता है। थेरपी पूरी होने के बाद उसे हल्की सर्जरी जैसा एहसास होता है, रोगी को कुछ घंटे के बाद घर भी भेज दिया जाता है। यह पूरी तरह से सुरक्षित प्रक्रिया है।

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World Meantal Health Day2022, Electroconvulsive therapy (ECT) for severe depression know its procedure
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay

ईसीटी थेरेपी के दुष्प्रभाव भी हैं?

डॉ ओमप्रकाश बताते हैं, किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया की तरह, ईसीटी के भी कुछ जोखिम हो सकते हैं। इसमें रोगी को कुछ समय के लिए याददाश्त की समस्या और सीखने-निर्णय लेने में कठिनाई महसूस हो सकती है। ज्यादातर मामलों में, कुछ समय में ये दिक्कतें स्वत: ठीक हो जाती हैं। उपचार के दिन ईसीटी के सबसे आम दुष्प्रभावों में रोगी के मतली, सिरदर्द, थकान, भ्रम जैसी दिक्कत हो सकती है, जो कुछ घंटे में ठीक हो जाती है।

अन्य उपचार माध्यमों से सस्ती है ये थेरपी
डॉ ओमप्रकाश बताते हैं, मनोरोग के अन्य उपचार माध्यमों की तुलना में ईसीटी प्रभावी भी है और सस्ती भी। इहबास जैसे सरकारी संस्थानों में यह बिल्कुल मुफ्त है, वहीं निजी संस्थानों में अन्य थेरेपी की तुलना में इसका खर्च कम आता है। गंभीर मेनिया, डिप्रेशन जैसी समस्याओं के उपचार में ईसीटी थेरेपी को अत्यधिक प्रभावी माना जाता रहा है। इसके बारे  में लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है जिससे न सिर्फ रोगी को प्रभावी उपचार प्राप्त हो सके साथ ही उसके मेडिकल खर्च को भी कम किया जा सके। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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