हार्मोन्स हमारे शरीर को संतुलित बनाए रखने में मदद करते हैं। हार्मोन्स एंडोक्राइन ग्रंथि में बनते है। यह रक्त द्वारा शरीर में पहुंचकर अलग-अलग भागों को कार्य करने के निर्देश देते हैं। अगर हार्मोन्स अंसतुलित हो जाए तो हमें कई गंभीर बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है। हार्मोन्स के असंतुलित होने के कई कारण होते हैं। इसलिए, हमें इस बात का बेहद ध्यान रखना चाहिए कि हार्मोन्स को कैसे संतुलित रखा जाए। आज हम आपको यह बताने जा रहें हैं कि कैसे आप अपने हार्मोन्स को संतुलन में रख सकते हैं।
शरीर में हार्मोन्स के असंतुलन से होती हैं ये घातक बीमारियां, जानिए लक्षण और सही इलाज
हार्मोन डालते हैं यह असर
हार्मोन के अंसतुलन से महिलाओं के शरीर पर बेहद असर पड़ता है। महिलाओं में महावारी, गर्भावस्था और मेनोपॉज के दौरान हार्मोन अंसतुलन की वजह से शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती हैं। पुरुषों में होर्मोन अंसतुलन के चलते चिड़चिड़ापन, यौन इच्छा में कमी, नपुंसकता, दाढ़ी या मूंछ के बालों का कम या ज्यादा उगना और शरीर में आलस्य जैसी समस्याएं आने लगती है। हार्मोनल असंतुलन की वजह से बच्चे के विकास में बाधा आती है।
असंतुलन के लक्षण
1.हार्मोन असंतुलन की वजह से हर समय थकान लगती है।
2.पेट सबंधी बिमारी जैसे गैस, कब्ज और बदहजमी होने लगती है।
3.तनाव, चिड़चिड़ापन और यौन इच्छा में कमी आने लगती है।
4.हार्मोन अंसतुलन से बालों का झड़ना, असमय सफेद होना तथा दाढ़ी घनी ना आने जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
5. हार्मोनल अंसतुलन के चलते नींद नहीं आती है।
क्या खाएं, क्या न खाएं
1.हार्मोन असंतुलन जैसी स्थिती में संतुलित आहार लेना चाहिए। संतुलित आहार खाने से आपके शरीर को सारे पोषक तत्व मिलते हैं।
2.महिलाओं को विशेषकर चाय, कॉफी, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
3. हार्मोन असंतुलन को संतुलित ऱखने के लिए ग्रीन टी का इस्तेमाल करना चाहिए।
4.ताजे फल व सब्जियों को सेवन अधिक करें।
5. अंडे, सूखे मेवे और चिकन को अपने आहार में शामिल करें। इन सभी पर्दार्थों में ओमेगा 3 व पाया जाता है, जो आपके हार्मोन्स को संतुलित रखते हैं।
हार्मोन्स और उनके काम-
इन्सुलिन – इन्सुलिन हमारे अमाशय में पाया जाता है। इन्सुलिन के जरिये ही हमारे ब्लड सेल्स को शर्करा प्राप्त होती है। इन्सुलिन शरीर में पाए जाने वाली कार्बोहाइड्रेट्स को उर्जा प्रदान करता है। यह खून में शर्करा का स्तर बनाए रखता है। इन्सुलिन की मात्रा कम होने की वजह से मधुमेह हो जाता है।
एस्ट्रोजन- यह हार्मोन महिलाओं के अंडाशय में पाया जाता है। एस्ट्रोजन मासिक धर्म और मेनोपॉज को संतुलित रखने का काम करता है। अगर शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा अधिक हो जाए तो महिलाओं को स्तन कैंसर, डिप्रेशन और मूड स्विंग जैसी गंभीर बिमारी हो सकती है। एस्ट्रोजन की मात्रा कम होने पर मुंहासों, त्वचा रोग,बाल झड़ना और पतले होने की समस्या पैदा होती हैं।
एड्रेनलिन: यह हार्मोन एड्रेनल ग्रंथि में पाया जाता है। एड्रेनलिन हार्मोन हमारी भावनाओं और मूड को तेजी से प्रभावित करता है।
प्रोलेक्टिन- प्रोलेक्टिन पिट्यूटरी ग्लैंड में पाया जाता है। यह हार्मोन माँ को स्तनपान कराने की क्षमता को बढ़ाता है। इसके अलावा यह हार्मोन महिलाओं की प्रजजन क्षमता को बढ़ाने का काम भी करता है।