शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खान-पान को लेकर सभी लोगों को खास सावधानी बरतते रहना चाहिए। हम जो कुछ भी खाते-पीते हैं उसका सेहत पर सीधा असर होता है, यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ उन चीजों के सेवन पर ज्यादा ध्यान देने की सलाह देते हैं जिनसे शरीर को आवश्यक पोषक तत्वों की आसानी से पूर्ति हो सके। विटामिन्स, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की कमी से सिर्फ शरीर में कमजोर या खून की कमी ही नहीं होती है, इसका हमारी लिवर की सेहत पर भी नकारात्मक असर हो सकता है।
जानना जरूरी: लिवर की सेहत बिगाड़ सकती है इन विटामिन्स की कमी, समय रहते पहचानें
विटामिन ए, डी, ई और के की कमी कुछ लिवर बीमारियों में देखी जा सकती है। विटामिन-बी की कमी भी कुपोषण और शराब से जुड़ी लिवर बीमारी में हो सकती है। संतुलित भोजन, सही जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
लिवर की बीमारियों का खतरा
विटामिन्स की कमी और लंबे समय तक खानपान में गड़बड़ी शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। यहां एक बात समझना जरूरी है कि विटामिन की कमी होने का मतलब हमेशा लिवर कमजोर होना नहीं है। कई बार लिवर की बीमारी के कारण ही शरीर विटामिन ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता।
- लिवर की बीमारी वाले कई लोगों में अक्सर विटामिन-ए, डी, ई और के जैसी विटामिन्स की कमी हो जाती है।
आइए जानते हैं कि ये विटामिन्स लिवर की सेहत से कैसे जुड़े हैं और इनकी कमी के का लिवर पर किस तरह से असर होता है।
विटामिन ए की कमी
- विटामिन ए आंखों की रोशनी, त्वचा और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए जरूरी है। इसकी कमी से रात में कम दिखाई देने, आंखों में सूखापन और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि लिवर की क्रॉनिक बीमारी में भी इसकी कमी देखी जाती है। लिवर शरीर में विटामिन-ए के भंडारण और प्रोसेसिंग का मुख्य केंद्र है। यह शरीर के कुल विटामिन ए भंडार का 80% से 90% हिस्सा 'हेपेटिक स्टैलेट सेल्स' नामक विशेष कोशिकाओं में 'रेटिनिल एस्टर' के रूप में जमा करके रखता है।
विटामिन-डी की कमी
- विटामिन-डी को हड्डियों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए जाना जाता है। क्रॉनिक लिवर डिजीज वाले लोगों में भी विटामिन डी की कमी आम देखी जाती है। अध्ययनों में पाया गया है कि विटामिन-डी की कमी फाइब्रोसिस का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है। नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज और क्रोनिक हेपेटाइटिस जैसी स्थितियों में इसकी कमी गंभीर सूजन और स्कारिंग (फाइब्रोसिस) का जोखिम बढ़ा देती है।
विटामिन ई की कमी
- विटामिन-ई शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाने में मदद करतू है। इसकी गंभीर कमी से नसों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ क्रॉनिक लिवर बीमारियों और फैट के अवशोषण में गड़बड़ी के दौरान इसकी कमी का खतरा बढ़ जाता है। विटामिन ई नॉन-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस से पीड़ित मरीजों में लिवर की सूजन और कोशिकाओं को होने वाले डैमेज को कम करने में मदद कर सकती है।
विटामिन के की कमी
- विटामिन-के खून का थक्का जमाने वाले प्रोटीन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर चोट लगने पर खून देर से रुक सकता है या आसानी से नील पड़ सकते हैं। पित्त के प्रवाह में रुकावट या फैट के अवशोषण में परेशानी होने पर इसकी कमी हो सकती है। विटामिन के घुलनशील विटामिन है। छोटी आंत में ठीक से अवशोषित होने के लिए, इसे लिवर और पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) द्वारा बनने वाले पित्त अम्लों की आवश्यकता होती है। कोलेस्टेटिक लिवर डिजीज, सिरोसिस या पित्त नली में रुकावट जैसी स्थितियां पित्त के प्रवाह को रोक देती हैं जिससे शरीर पोषक तत्वों को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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