क्या आप भी अक्सर लोगों का नाम और किसी चीज को रखकर भूल जाते हैं? इस तरह की दिक्कतें होना बहुत आम है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक छोटी-मोटी चीजें भूल जाने की समस्या किसी को भी हो सकती है।
हेल्थ की बात: बार-बार भूलने की आदत कब सामान्य और कब चिंता की बात? यहां जानिए
Forgetfulness: कभी-कभार छोटी-छोटी बातें भूलना सामान्य हो सकता है, लेकिन लगातार बढ़ती भूलने की आदत पर ध्यान देना जरूरी है। नींद की कमी, तनाव, डिप्रेशन, विटामिन-बी12 की कमी और कुछ बीमारियां याददाश्त को प्रभावित कर सकती हैं। रोजमर्रा के काम प्रभावित हों तो डॉक्टर से सलाह लें।
याददाश्त की समस्याओं का कारण
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता कि याददाश्त पर उम्र के साथ कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन हर तरह की मेमोरी लॉस को बढ़ती उम्र का लक्षण नहीं माना जा सकता। अध्ययनों में पाया गया है कि कई बार स्ट्रेस-एंग्जायटी, डिप्रेशन, कुछ दवाओं और विटामिन बी12 की कमी जैसी स्थितियां भी याददाश्त को प्रभावित कर सकती हैं।
- कभी-कभार किसी परिचित का नाम याद न आना, चश्मा या चाबी रखकर भूल जाना या किसी काम के लिए कमरे में जाकर कुछ समय के लिए याद ही न आना कि आप क्यों आए थे, ये सब बहुत सामान्य है।
- अगर भूलने की समस्याएं कभी-कभार होती हैं तो हर बार घबराने की जरूरत नहीं है।
- पर अगर इसका आपके कामकाज और रोजमर्रा के जीवन पर असर पड़ रहा है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए।
नींद और स्ट्रेस के कारण हो सकती है दिक्कत
जिन लोगों को नींद की समस्या होती है या फिर स्ट्रेस की समस्या होती है, उन्हें याददाश्त से संबंधित दिक्कतों का खतरा अधिक हो सकता है।
- नींद दिमाग को दिनभर की जानकारी व्यवस्थित करने और यादों को मजबूत बनाने में मदद करती है। इसलिए नींद की गड़बड़ी होने पर ध्यान केंद्रित करना, नई जानकारी सीखना और उसे याद रखना मुश्किल हो सकता है।
- इसी तरह तनाव के दौरान दिमाग का ध्यान चिंता से जुड़ी बातों पर लगा रह सकता है, जिससे जरूरी जानकारी ठीक से याद नहीं रह पाती।
- चिंता और डिप्रेशन भी एकाग्रता और याददाश्त को प्रभावित कर सकते हैं।
इन कारणों से भी हो सकती है याददाश्त की दिक्कत
याददाश्त कमजोर होने के पीछे केवल उम्र या तनाव ही जिम्मेदार नहीं होते। कई अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी याददाश्त को प्रभावित करने वाली हो सकती हैं।
- विटामिन बी12 नर्वस सिस्टम के सामान्य काम के लिए जरूरी है। इसकी कमी से भ्रम, सोचने में परेशानी और भूलने की समस्या हो सकती है।
- कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव से ध्यान केंद्रित करना और याददाश्त प्रभावित हा सकता है।
- थायरॉइड या कुछ हार्मोनल बीमारियां भी सोचने-समझने की क्षमता पर असर डाल सकती हैं।
- डिमेंशिया जैसी स्थिति में याददाश्त, भाषा, निर्णय लेने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित हो सकती है।
कब भूलने की दिक्कतों को लेकर हो जाएं सतर्क?
यदि कोई बार-बार एक ही सवाल पूछ रहा है, परिचित जगह का रास्ता भूल जाता है, रोज के काम पूरे करने में परेशानी होती है या उसकी भाषा और व्यवहार में लगातार बदलाव आ रहा है, तो इसपर गंभीरता से ध्यान देते हुए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सभी लोगों को परिवार के दूसरे लोगों के बदलावों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।
यदि किसी में भ्रम या याददाश्त में बदलाव अचानक शुरू हो, चेहरे या हाथ-पैर में कमजोरी, बोलने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टरी लें, ये स्ट्रोक का संकेत हो सकता है जो मेडिकल इमरजेंसी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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