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सेहत की बात: वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगड़ने से क्या होता है? स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये उपाय

Tue, 13 Oct 2026 09:30 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 13 Oct 2026 09:30 AM IST
सार

खराब दिनचर्या, असंतुलित खानपान, शारीरिक निष्क्रियता और नींद की कमी से लाइफस्टाइल में गड़बड़ी से संबंधित बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। आयुर्वेद संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, योग, प्राणायाम और ध्यान पर जोर देता है।

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Vata, Pitta and Kapha Understanding the Ayurvedic Approach to Wellness
बीमारियों का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

लोगों की लाइफस्टाइल जिस तरह गड़बड़ होती जा रही है, इसने कई तरह की बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। लगभग हर उम्र के लोगों में इसका खतरा हो सकता है। हम किस तरह का जीवन जीते हैं, क्या खाते हैं, कब सोते हैं, दिनचर्या की इन सभी आदतों का सेहत पर सीधा असर होता है।



डॉक्टर बताते हैं जिन लोगों की दिनचर्या गड़बड़ होती है उनमें कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों के विकसित होने का खतरा हो सकता है। डायबिटीज से लेकर हृदय रोग, मेटाबॉलिज्म की समस्या हो या फिर मोटापा, ये सभी लाइफस्टाइल में गड़बड़ी से संबंधित मानी जाती हैं।

आयुर्वेद कहता है कि सभी लोगों को शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) में असंतुलन से बचाव के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। अगर इस दिशा में प्रयास किए जाएं तो तेजी से बढ़ती कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए इस बारे में जानते हैं।

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Vata, Pitta and Kapha Understanding the Ayurvedic Approach to Wellness
डायबिटीज-हार्ट की समस्या - फोटो : Freepik.com

लाइफस्टाइल की गड़बड़ी से होने वाली बीमारियां

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल की गड़बड़ी जैसे शारीरिक गतिविधि की कमी, अस्वास्थ्यकर भोजन, शराब-मादक द्रव्यों के सेवन के कारण हृदय रोग, स्ट्रोक, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और फेफड़ों का कैंसर तक का खतरा हो सकता है। इनमें से कई बीमारियों को जानलेवा भी माना जाता है।

कम उम्र से ही सभी लोगों को लाइफस्टाइल को ठीक रखने का प्रयास करना चाहिए। ये वैश्विक स्तर पर बढ़ते इन रोगों के खतरे को कम करने के लिए बहुत आवश्यक है।

आइए जानते हैं कि इसके लिए आयुर्वेद क्या सलाह देता है?

Vata, Pitta and Kapha Understanding the Ayurvedic Approach to Wellness
पौष्टिक चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com

संतुलित आहार से सभी दोष रहते हैं संतुलित


आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार, संतुलित आहार का मतलब केवल हमारे द्वारा खाए जाने वाले विशिष्ट खाद्य पदार्थों से ही नहीं है, बल्कि उन खाद्य पदार्थों के स्वाद, गुणों और संयोजनों के बारे में भी जानना जरूरी है।
 

  • आयुर्वेद छह स्वादों को पहचानता है- मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपमें सभी दोष (वात, पित्त और कफ) संतुलित रहें हैं, संतुलित आहार में सभी छह स्वादों को उचित अनुपात में शामिल किया जाना चाहिए। ताजा, मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन बहुत जरूरी है।


दिनचर्या को रखें ठीक

दैनिक दिनचर्या का ठीक रहना समग्र स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सबसे आवश्यक अंग है। सुबह जल्दी उठने से लेकर, तेल से मालिश करने, स्नान और योग जैसी गतिविधियों से शरीर को आराम मिलता है।
 

  • मन को शांत करने के लिए संतुलित नाश्ता, नियमित व्यायाम और ध्यान करें। हर रात 7-8 घंटे की आरामदायक नींद का लक्ष्य बनाना शरीर के लिए बहुत आवश्यक है।
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Vata, Pitta and Kapha Understanding the Ayurvedic Approach to Wellness
योग से लाभ - फोटो : Amarujala.com/Ai

योग और ध्यान जरूरी

योग और प्राणायाम (सांस लेने के व्यायाम) आपके शरीर, मन और आत्मा में सामंजस्य स्थापित करने में मदद करते हैं। यह पूरे शरीर में ऊर्जा के कुशल प्रवाह को बढ़ावा देते हुए लचीलेपन, ताकत और संतुलन में सुधार करता है। योग आसन और ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से तनाव कम करने में मदद मिलती है जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है।
 

  • सूर्य नमस्कार, सांस लेने के व्यायाम और मेडिटेशन जैसे अभ्यास इन दोषों को संतुलित करने, परिसंचरण में सुधार करने और समग्र जीवन शक्ति को बढ़ाने में मदद करते हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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