शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सभी अंगों का ठीक तरीके से काम करते रहने की जरूरत होता है। हालांकि जब शरीर के अंगों की बात होती है तो सबसे पहले हमारे दिमाग में हार्ट-लंग्स, किडनी और लिवर का ही ख्याल आता है।
सावधान: इस अंग में कोई दिक्कत हुई तो पाचन और शुगर दोनों की बढ़ सकती है परेशानी, अक्सर लोग कर देते हैं इग्नोर
Health Alert: पैंक्रियाज भोजन पचाने वाले एंजाइम और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने वाले हार्मोन्स बनाता है। इसमें सूजन या दूसरी गड़बड़ी होने पर पेट दर्द, दस्त, वजन घटने और कुछ मामलों में डायबिटीज की समस्या हो सकती है।
पैंक्रियाज की ठीक तरीके से काम करते रहना जरूरी
जब हम खाना खाते हैं, तो अग्न्याशय पाचन में मदद करने वाले एंजाइम बनाता है। ये एंजाइम भोजन में मौजूद वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को छोटे हिस्सों में तोड़ने में मदद करते हैं। इसके अलावा, अग्न्याशय इंसुलिन और ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन भी बनाता है, जो ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
- अगर इस अंग में सूजन, चोट या दूसरी गड़बड़ी हो जाए, तो भोजन पचाने से लेकर और शुगर को कंट्रोल रखने तक सबकुछ प्रभावित हो सकता हैं।
यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ हार्ट-लिवर की ही तरह पैंक्रियाज को भी स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।
पैंक्रियाज शरीर में क्या-क्या काम करता है?
पैंक्रियाज पेट के पीछे स्थित एक ग्रंथि है, जो पाचन और हार्मोन्स को कंट्रोल करने जैसे काम करती है।
- यह पाचन एंजाइम बनाता है, जो छोटी आंत में पहुंचकर भोजन को पचाने में मदद करती है। इतना ही नहीं अग्न्याशय बाइकार्बोनेट भी बनाता है, जो पेट से छोटी आंत में पहुंचने वाले अम्ल को निष्क्रिय करने में मदद करता है।
- अग्न्याशय इंसुलिन और ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन बनाता है। इंसुलिन रक्त में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है, जबकि ग्लूकागॉन जरूरत पड़ने पर शुगर को बढ़ाने में भूमिका निभाता है।
इसलिए अग्न्याशय में गड़बड़ी पाचन और शुगर, दोनों को प्रभावित कर सकती है।
पैंक्रियाज की समस्याओं का पाचन पर असर
अगर पैंक्रियाज पर्याप्त मात्रा में पाचन एंजाइम नहीं बना पाता या एंजाइम छोटी आंत तक ठीक से नहीं पहुंचता, तो भोजन का पाचन प्रभावित हो सकता है। इस स्थिति को एक्सोक्राइन पैंक्रियाटिक इंसफिशिएंसी कहा जाता है।
- इसमें खासकर वसा का पाचन प्रभावित हो सकता है। इसके कारण आपको पेट फूलने, गैस, दस्त, वजन घटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक पोषक तत्वों का अवशोषण ठीक से न होने पर शरीर में विटामिन ए, डी, ई और के की कमी भी हो सकती है।
ब्लड शुगर पर इसका असर
अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएं शुगर लेवल को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि पैंक्रियाज में कोई दिक्कत हो जाए तो इससे इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। लंबे समय में इससे डायबिटीज होने का जोखिम हो सकता है।
- अग्न्याशय की बीमारी से होने वाले डायबिटीज को टाइप-3सी डायबिटीज भी कहा जाता है। यह क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस, पैंक्रियाज की सर्जरी या कुछ अन्य स्थितियों के बाद हो सकता है।
अग्न्याशय की समस्या में पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द मितली और उल्टी हो सकती है। उल्टी के साथ अचानक पेट में तेज दर्द पैंक्रियाटाइटिस का संकेत हो सकता है। इस तरह की दिक्कतों में समय रहते डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी माना जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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