मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती समस्याओं को लेकर दुनियाभर के विशेषज्ञ अलर्ट कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में 1.2 अरब से ज्यादा लोग किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। मसलन हर 7 में से 1 व्यक्ति इसका शिकार हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य: किसी करीबी को डिप्रेशन हो तो उससे कैसी बात करें? सलाह न दें, ऐसे करें मदद
World Mental Health Day: डिप्रेशन से जूझ रहे करीबी की मदद के लिए उसकी बात ध्यान से सुनें, बिना जज किए उसकी भावनाओं को समझें और व्यावहारिक मदद दें। खुश रहो या दूसरों को देखो जैसी बातें कहने से बचें। परेशानी लंबे समय तक बनी रहे तो उसे समय रहते मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास ले जाएं।
डिप्रेशन की समस्या में मदद
जब कोई अपना मानसिक परेशानी से गुजर रहा हो, तो उसे ठीक देखने की इच्छा स्वाभाविक है। ऐसे में हम अक्सर उसे समझाने, सलाह देने या उसका मन बदलने की कोशिश करते हैं। लेकिन कई बार मदद करने के इरादे से कही गई बात भी उसे दुख पहुंचा सकती है।
- डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति को हमेशा यह नहीं पता होता कि वह ऐसा क्यों महसूस कर रहा है? मरीज रोजमर्रा के कामों में रुचि खो सकता है या छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा हो सकता है।
- ऐसे समय में उसे डांटने या जबरन खुश करने के बजाय उसकी बात सुनना और बिना किसी फैसले के उसका साथ देना ज्यादा जरूरी है।
- सही बातचीत उसे अकेलापन महसूस होने से बचा सकती है, जिसका डिप्रेशन की समस्या में सबसे ज्यादा खतरा देखा जाता रहा है।
डिप्रेशन के मरीजों से कैसे डील करें?
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपको लग रहा है कि आपका कोई करीबी पहले से ज्यादा उदास, चुप या लोगों से दूर रहने लगा है, तो उससे अकेले में और आराम से बात करें।
- उसे ऐसा महसूस कराएं कि आप उसका साथ देने के लिए आए हैं न कि उसको जज करने या उसकी समस्या को और बढ़ाने।
- डिप्रेशन के मरीजों को अक्सर ऐसे लोगों की जरूरत होती है जो उसकी बात बिना जज किए बस सुन ले। इसलिए बात करते समय उसे बीच में न रोकें और न ही हर बात का समाधान तुरंत बताने लगें। उसे अपनी भावनाएं जाहिर करने का समय दें।
- अगर वह उस वक्त बात नहीं करना चाहता, तो दबाव न डालें। उसे भरोसा दिलाएं कि जब भी वह बात करना चाहेगा, आप सुनने के लिए मौजूद हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कुछ बातें डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति को यह महसूस करा सकती हैं कि उसकी परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। आमतौर पर ऐसे लोगों से कुछ तरह की बातें करने से बचना चाहिए।
- 'इतना मत सोचो, सब ठीक हो जाएगा।' इससे उसकी तकलीफ छोटी बताने जैसा लग सकता है।
- 'तुम्हारे पास तो सब कुछ है, फिर दुख किस बात का?' डिप्रेशन केवल बाहरी परिस्थितियों से तय नहीं होता।
- 'खुश रहा करो, सकारात्मक सोचो।' इससे व्यक्ति पर खुद को ठीक दिखाने का दबाव पड़ सकता है।
- 'दूसरों की जिंदगी में तुमसे बड़ी परेशानियां हैं।' दूसरों से तुलना करने से वह अपनी बात बताने में हिचक सकता है।
समय रहते डॉक्टर के पास ले जाएं
अगर आपके किसी करीबी में उदासी, निराशा या रोजमर्रा के कामों में रुचि की कमी लगातार बनी हुई है तो समय रहते उसे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास लेकर जाएं।
- डिप्रेशन का इलाज संभव है। जरूरत के अनुसार मनोचिकित्सा और दवाओं की मदद से लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है।
- अगर वह खुद को नुकसान पहुंचाने या जान देने की बात करे, तो इसे हल्के में न लें। उसे अकेला न छोड़ें।
- डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्याओं में जितनी जल्दी डॉक्टरी मदद मिल जाए समस्या के ठीक होने की संभावना उतनी बढ़ जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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