करवा चौथ 2026: प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का व्रत रखना चाहिए या नहीं? गायनेकोलॉजिस्ट ने दी जानकारी
Karwa Chauth Fasting During Pregnancy: प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का निर्जला व्रत रखना कितना सुरक्षित है? जानें गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह, व्रत रखने के संभावित नुकसान, जरूरी सावधानियां और गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित विकल्प।
गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह के अनुसार, गर्भावस्था में सूर्योदय से चंद्रोदय तक बिना खाना-पानी के रहना यानी निर्जला व्रत रखना जोखिम भरा हो सकता है। गर्भावस्था में शरीर को पर्याप्त पानी, ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। धार्मिक उपवास और प्रेग्नेंसी पर उपलब्ध रिसर्च सीमित हैं, इसलिए निर्जला व्रत को सभी गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
- डिहाइड्रेशन: लंबे समय तक पानी नहीं पीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
- कमजोरी और चक्कर: खाली पेट रहने से थकान, सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या हो सकती है।
- ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव: खासकर डायबिटीज से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
- गर्भावस्था में जटिलताओं का जोखिम: पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने पर उपवास का जोखिम बढ़ सकता है।
किन गर्भवती महिलाओं को व्रत रखने से बचना चाहिए?
जिन महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज, एनीमिया, लगातार उल्टी, डिहाइड्रेशन या हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समस्या है, उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के व्रत नहीं रखना चाहिए। गर्भावस्था के शुरुआती या आखिरी महीनों में भी अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
अगर करवा चौथ मनाना है, तो क्या करें?
- निर्जला व्रत के बजाय डॉक्टर की सलाह से फलाहार या हल्का भोजन लें।
- दिनभर पर्याप्त पानी और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ पीती रहें।
- फल, दूध, दही, मेवे और पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें।
- लंबे समय तक खड़े रहने, ज्यादा मेहनत करने और गर्मी में रहने से बचें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना जरूरी दवाएं या प्रेग्नेंसी सप्लीमेंट लेना बंद न करें।
ध्यान रखें कि केवल फलाहार करने से भी हर गर्भवती महिला के लिए व्रत सुरक्षित नहीं हो जाता। यह फैसला अपनी मेडिकल स्थिति के अनुसार ही लें।