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करवा चौथ 2026: किन महिलाओं को नहीं रखना चाहिए निर्जला व्रत?
Mon, 26 Oct 2026 10:39 AM IST
श्रुति गौड़
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Mon, 26 Oct 2026 10:39 AM IST
सार
Karwa Chauth Fasting Tips: हर महिला के लिए करवाचौथ का व्रत काफी अहम होता है। पर, अगर इसकी वजह से आपकी सेहत बिगड़ रही है तो आपको थोड़ा संभलने की जरूरत है। आइए जानते हैं कि किन लोगों को करवाचौथ का व्रत रखने से बचना चाहिए।
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किन लोगों को नहीं रखना चाहिए निर्जला व्रत?
- फोटो : AI
Karwa Chauth Fasting Tips: करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन कई महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत में सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन और पूजा तक अन्न और पानी का सेवन नहीं किया जाता। हालांकि, धार्मिक आस्था के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।
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किन लोगों को नहीं रखना चाहिए निर्जला व्रत?
- फोटो : AI
करवा चौथ का निर्जला व्रत किन लोगों को नहीं रखना चाहिए?
1. डायबिटीज के मरीज
डायबिटीज के मरीजों के लिए लंबे समय तक बिना खाए-पिए रहना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली दवाएं लेने वालों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का खतरा रहता है। कुछ मरीजों में ब्लड शुगर बढ़ने और डिहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
2. गर्भवती महिलाएं
गर्भावस्था के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी और पोषण की जरूरत होती है। निर्जला व्रत से डिहाइड्रेशन, चक्कर और कमजोरी हो सकती है। खासकर जिन महिलाओं को उल्टी, लो ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था से जुड़ी कोई जटिलता है, उन्हें व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
1. डायबिटीज के मरीज
डायबिटीज के मरीजों के लिए लंबे समय तक बिना खाए-पिए रहना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली दवाएं लेने वालों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का खतरा रहता है। कुछ मरीजों में ब्लड शुगर बढ़ने और डिहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
2. गर्भवती महिलाएं
गर्भावस्था के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी और पोषण की जरूरत होती है। निर्जला व्रत से डिहाइड्रेशन, चक्कर और कमजोरी हो सकती है। खासकर जिन महिलाओं को उल्टी, लो ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था से जुड़ी कोई जटिलता है, उन्हें व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
किन लोगों को नहीं रखना चाहिए निर्जला व्रत?
- फोटो : AI
3. स्तनपान कराने वाली महिलाएं
स्तनपान के दौरान शरीर में तरल पदार्थों की जरूरत बढ़ जाती है। लंबे समय तक पानी नहीं पीने से मां को प्यास, सिरदर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। कुछ महिलाओं में दूध बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है, विशेषकर जब पानी और भोजन की कमी अधिक हो।
4. किडनी और दिल के मरीज
किडनी या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को अपनी बीमारी और दवाओं के अनुसार तरल पदार्थों का सेवन नियंत्रित करना पड़ सकता है। निर्जला व्रत से डिहाइड्रेशन या दवाओं के असर में बदलाव का जोखिम हो सकता है। इन मरीजों को अपने डॉक्टर की सलाह के बिना व्रत नहीं रखना चाहिए।
स्तनपान के दौरान शरीर में तरल पदार्थों की जरूरत बढ़ जाती है। लंबे समय तक पानी नहीं पीने से मां को प्यास, सिरदर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। कुछ महिलाओं में दूध बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है, विशेषकर जब पानी और भोजन की कमी अधिक हो।
4. किडनी और दिल के मरीज
किडनी या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को अपनी बीमारी और दवाओं के अनुसार तरल पदार्थों का सेवन नियंत्रित करना पड़ सकता है। निर्जला व्रत से डिहाइड्रेशन या दवाओं के असर में बदलाव का जोखिम हो सकता है। इन मरीजों को अपने डॉक्टर की सलाह के बिना व्रत नहीं रखना चाहिए।
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किन लोगों को नहीं रखना चाहिए निर्जला व्रत?
- फोटो : AI
5. लो ब्लड प्रेशर और बार-बार चक्कर आने वाले लोग
जिन लोगों को पहले से लो ब्लड प्रेशर, बेहोशी, कमजोरी या चक्कर आने की समस्या है, उनमें बिना पानी पिए रहने से परेशानी बढ़ सकती है। खासकर गर्मी, अधिक शारीरिक मेहनत या लंबे समय तक खड़े रहने पर लक्षण गंभीर हो सकते हैं।
6. बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग
बढ़ती उम्र में प्यास का एहसास कम हो सकता है। बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक हो सकता है, विशेषकर यदि वे मूत्रवर्धक दवाएं लेते हैं। बुखार, उल्टी, दस्त या किसी गंभीर बीमारी से उबर रहे लोगों को भी निर्जला व्रत से बचना चाहिए या डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए।
जिन लोगों को पहले से लो ब्लड प्रेशर, बेहोशी, कमजोरी या चक्कर आने की समस्या है, उनमें बिना पानी पिए रहने से परेशानी बढ़ सकती है। खासकर गर्मी, अधिक शारीरिक मेहनत या लंबे समय तक खड़े रहने पर लक्षण गंभीर हो सकते हैं।
6. बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग
बढ़ती उम्र में प्यास का एहसास कम हो सकता है। बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक हो सकता है, विशेषकर यदि वे मूत्रवर्धक दवाएं लेते हैं। बुखार, उल्टी, दस्त या किसी गंभीर बीमारी से उबर रहे लोगों को भी निर्जला व्रत से बचना चाहिए या डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए।
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निर्जला व्रत के दौरान क्या सावधानियां बरतें?
- व्रत से पहले पर्याप्त पानी पिएं और संतुलित भोजन करें।
- सरगी में फल, दही, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।
- तेज धूप, भारी व्यायाम और अधिक शारीरिक मेहनत से बचें।
- चक्कर, कंपकंपी, भ्रम, बेहोशी या बहुत ज्यादा कमजोरी होने पर व्रत जारी रखने की जिद न करें। जरूरत पड़ने पर तुरंत पानी और चिकित्सकीय सहायता लें।
- डायबिटीज या अन्य पुरानी बीमारी की दवाएं अपने आप बंद या उनके समय में बदलाव न करें।
- यदि डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह दी है, तो पानी की मात्रा भी उन्हीं के निर्देशानुसार रखें।