कैंसर का नाम सुनते ही मन में एक अजीब सा डर पैदा हो जाता है। कुछ दशकों पहले तक इसे लाइलाज बीमारी माना जाता था, हालांकि समय के साथ मेडिकल साइंस की प्रगति और कारगर दवाओं ने अब न सिर्फ इसके इलाज को आसान बना दिया है, बल्कि कैंसर से ठीक होकर लोग लंबी जिंदगी भी जी रहे हैं।
अलर्ट: परिवार में किसी को कैंसर नहीं, फिर भी हो सकती है बीमारी? कैंसर के इन फैक्ट्स से अनजान तो नहीं हैं आप
Cancer Diagnosis: कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। आनुवंशिकता, संक्रमण और जीवनशैली में गड़बड़ी इसका जोखिम बढ़ा सकते हैं। सही जानकारी, समय पर जांच, टीकाकरण से इसके खतरे को कम किया जा सकता है।
कैंसर कई प्रकार का होता है और हर प्रकार के कैंसर के लक्षण, जोखिम और इलाज अलग होते हैं। कुछ कैंसर शुरुआती जांच से पकड़ में आ जाते हैं, जबकि कुछ के लक्षण बहुत देर से दिखाई देते हैं। ऐसे में बीमारी को लेकर सही जानकारी, समय पर जांच और उचित इलाज को समझना जरूरी है। आइए इसके कुछ फैक्ट्स जान लेते हैं।
कई बीमारियों का समूह है कैंसर
कैंसर सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि कई बीमारियों का समूह है। स्तन, फेफड़े, मुंह, सर्विक्स, प्रोस्टेट और ब्लड कैंसर इसके अलग-अलग प्रकार हैं। इनके लक्षण, जोखिम और इलाज अलग होते हैं। हर कैंसर में गांठ बनना जरूरी नहीं है।
- कई बार कैंसर शरीर में बढ़ता रहता है पर लंबे समय तक इसका पता ही नहीं चल पाता। कैंसर को पहचानने में जितनी देरी होती है इसके इलाज में उतनी मुश्किलें हो सकती हैं।
कैंसर में हमेशा दर्द नहीं होता
कई कैंसर शुरुआती चरण में बिना दर्द या स्पष्ट लक्षणों के भी हो सकते हैं। दर्द के अलावा अगर बिना कारण वजन घट रहा है, लगातार खांसी आ रही है, शरीर में कहीं नई गांठ है या फिर मल या पेशाब में खून और असामान्य रक्तस्राव जैसे दिक्कतें हो रही हैं तो इसे नजरअंदाज न करें। इनका मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन परेशानी बनी रहे तो डॉक्टर से जांच जरूर करा लें।
परिवार में कैंसर न हो, तब भी हो सकती है खतरा
सभी कैंसर आनुवंशिक नहीं होते। बढ़ती उम्र, तंबाकू-शराब, एचपीवी जैसे संक्रमण और पर्यावरणीय कारक भी कैंसर का जोखिम बढ़ा देते हैं। इसलिए तंबाकू-शराब से दूर बनाना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना आपको कैंसर के खतरे से बचाने में मदद कर सकता है। परिवार में कैंसर नही हैं पर अगर आप रसायनों के अधिक संपर्क में रहते हैं या फिर मोटापे का शिकार हैं तो भी कैंसर का खतरा हो सकता है।
लक्षण न होने पर भी स्क्रीनिंग जरूरी
चूंकि कुछ प्रकार के कैंसर में शुरुआत में लक्षण नहीं दिखते, यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ 40 की उम्र के बाद सभी लोगों को डॉक्टर की सलाह पर नियमित स्क्रीनिंग कराने की सलाह देते हैं। स्क्रीनिंग से बिना लक्षण वाले कैंसर या उनसे पहले होने वाले बदलावों का पता लगाया जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर के लिए एचपीवी या पैप टेस्ट और स्तन कैंसर के लिए मैमोग्राफी की मदद से समय रहते समस्या का पता लगाया जा सकता है।
कुछ संक्रमण भी बढ़ाते हैं कैंसर का खतरा
कुछ प्रकार की संक्रामक बीमारियां भी आपमें कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। एचपीवी संक्रमण से सर्वाइकल कैंसर का खतरा रहता है, जबकि हेपेटाइटिस बी और सी के संक्रमण से लिवर कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। एच. पाइलोरी बैक्टीरिया का संक्रमण पेट के कैंसर के जोखिमों का कारण बन सकता है, इस बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।