कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण की गंभीरता के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ डेल्टा वेरिएंट को मुख्य कारक के रूप में देख रहे हैं। कई रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि डेल्टा का म्यूटेटेड रूप डेल्टा प्लस वेरिएंट, भारत में कोरोना की तीसरी लहर का कारण बन सकता है। कोरोना की तीसरी लहर कब आएगी और यह कितनी गंभीर होगी, ऐसे सवाल आपके मन में भी जरूर होंगे। इन सबको लेकर लगातार फैल रही भ्रामक जानकारियों के बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महामारी विशेषज्ञों ने तीसरी लहर की गंभीरता को लेकर बड़ा दावा किया है। डॉ समीरन पांडा ने कहा है कि कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर, दूसरी जितनी गंभीर नहीं होगी। लोगों को इससे बहुत ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है, हांलाकि बचाव के उपायों को अपनाने में भी कोई कोताही नहीं बरती जानी चाहिए।
कोरोना की तीसरी लहर: आईसीएमआर विशेषज्ञों ने दी राहत भरी जानकारी, इस बात को लेकर किया अलर्ट
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अध्ययन में सामने आई यह बात
इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईजेएमआर) में प्रकाशित मैथमेटिकल मॉडलिंग विश्लेषण पर आधारित एक अध्ययन में वैक्सीनेशन और तीसरी लहर की रोकथाम विषय पर प्रकाश डाला गया है। अध्ययन में शोधकर्ताओं का कहना है कि देश में वैक्सीनेशन अभियान को अगर और तेज कर दिया जाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण हो सके, तो तीसरी लहर को काफी हद तक नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
ज्यादा गंभीर नहीं होगी तीसरी लहर
'भारत में कोविड-19 की तीसरी लहर की संभावना: एक गणितीय मॉडलिंग आधारित विश्लेषण' नाम से इस अध्ययन को आईसीएमआर में डीजी बलराम भार्गव, संदीप मंडल और समीरन पांडा द्वारा लिखा गया है। निष्कर्ष में विशेषज्ञों ने बताया है कि कई स्तर पर किए गए अध्ययन के आधार पर कहा जा सकता है कि तीसरी लहर के ज्यादा गंभीर होने की आशंका कम है।
देश में तेजी से हो रहा है वैक्सीनेशन
विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरी लहर के खत्म होने के तीन महीने की अवधि में देश की 40 फीसदी आबादी को वैक्सीन की दोनों खुराक मिलने की उम्मीद की जा रही है। अगर ऐसा होता है कि तो तीसरी लहर में कोरोना के सिम्टोमेटिक मामलों में 55 फीसदी तक की कमी होने की उम्मीद की जा रही है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक देश की करीब 20 फीसदी आबादी को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है वहीं करीब 4 फीसदी लोगों का पूरी तरह से टीकाकरण हो लगाया गया है। केंद्र सरकार ने इस साल के अंत कर सभी वयस्कों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा है।
कोविड उपयुक्त व्यवहार की पालन आवश्यक
डॉ. पांडा कहते हैं, दूसरी लहर में दिखे गंभीर परिणामों से सीख लेने की जरूरत है, तीसरी लहर से बचाव में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। देश में भले ही कोरोना के मामले कम हो रहे हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के प्रति लापरवाही बरतना खतरनाक हो सकता है। मास्क लगातार और सही तरीके से पहनने के साथ टीकाकरण कराना सभी लोगों के लिए बेहद आवश्यक है। तीसरी लहर को गंभीर बनने से रोकने में इनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।
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स्रोत और संदर्भ:
Indian journal of medical research
अस्वीकरण नोट: यह लेख इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईजेएमआर) में प्रकाशित मैथमेटिकल मॉडलिंग विश्लेषण पर आधारित एक अध्ययन
के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। बीमारी के बारे में विस्तार से जानने के लिए किसी डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।