हाई ब्लड प्रेशर को सेहत के लिए सबसे खतरनाक स्वास्थ्य स्थितियों में से एक माना जाता है। अगर इसे कंट्रोल न किया जाए तो इससे दिल की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। ये भी माना जाता रहा है कि ब्लड प्रेशर की दिक्कत सिर्फ वयस्कों और बुजुर्गों को होती है, पर असलियत ये है कि बच्चे भी इस समस्या का शिकार हो सकते हैं।
हेल्थ की बात: बच्चों का ब्लड प्रेशर भी हो सकता है हाई, माता-पिता इन लक्षणों को बिल्कुल न करें अनदेखा
High BP In Children: बच्चों का ब्लड प्रेशर उनकी उम्र, लंबाई और लिंग के अनुसार अलग होता है। मोटापा, किडनी की बीमारी और खराब जीवनशैली हाई बीपी का जोखिम बढ़ा सकते हैं। तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों का बीपी नियमित रूप से जांचना जरूरी है। लगातार बढ़ी रीडिंग आने पर डॉक्टर से सलाह लें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं बच्चों का ब्लड प्रेशर उनकी उम्र, लंबाई और लिंग के हिसाब से अलग हो सकता है। इसलिए बड़ों के लिए इस्तेमाल होने वाली सामान्य रीडिंग से बच्चों का बीपी नहीं मानना चाहिए।
बच्चों का ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए?
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक छोटे बच्चों में सामान्य बीपी की रीडिंग किशोरों से अलग होती है। इसलिए सभी बच्चों के लिए 120/80 को सामान्य मानना सही नहीं है। 1 से 13 वर्ष की आयु के बच्चों की रीडिंग 90mmHg से कम होनी चाहिए।
नवजात शिशुओं का औसत बीपी लगभग 64/41 mmHg होता है।
- 3 से 6 महीने: लगभग 70-90 / 50-65 mmHg
- 6 से 12 महीने: लगभग 80-100 / 55-65 mmHg
- 1 से 3 साल: लगभग 90-105 / 55-70 mmHg
- 3 से 6 साल: लगभग 95-110 / 60-75 mmHg
- 6 से 12 साल: लगभग 100-120 / 60-75 mmHg
- 13 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए सामान्य बीपी 120/80 से कम माना जाता है।
बच्चों में हाई बीपी होने की दिक्कत क्यों होती है?
बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सामान्य तौर पर अधिक वजन, ज्यादा नमक वाला खाना खाना, नियमित व्यायाम की कमी और परिवार में हाई बीपी की हिस्ट्री बच्चों के जोखिमों को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा किडनी की बीमारी, हृदय की कुछ समस्याएं, हार्मोन संबंधी गड़बड़ियां और कुछ दवाएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।
- खास बात यह है कि छोटे बच्चों में हाई बीपी होने पर किसी अंदरूनी बीमारी के खतरों पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।
- इसे केवल मोटापे या खानपान के कारण होने वाली समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बच्चों में हाई बीपी के क्या खतरे हैं?
अगर लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहे, तो इसका असर हृदय, किडनी और रक्त वाहिकाओं पर पड़ सकता है। बचपन में हाई बीपी आगे चलकर भी हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती है। कुछ बच्चों में सिरदर्द, चक्कर या धुंधला दिखाई देने जैसी शिकायतें हो सकती हैं, लेकिन अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तीन साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों का ब्लड प्रेशर नॉर्मल हेल्थ चेकअप के दौरान साल में कम से कम एक बार जरूर चेक करना चाहिए। अगर बच्चे को मोटापा, किडनी की बीमारी, डायबिटीज है या वह ऐसी दवाएं ले रहा है जिनसे बीपी बढ़ सकता है, तो डॉक्टर से मिलकर समय-समय पर बीपी टेस्ट कराते रहना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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