कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ वैक्सीनेशन को सबसे कारगर उपाय मान रहे हैं, कई अध्ययनों से पता चलता है कि दोनों डोज ले चुके लोगों में संक्रमण का खतरा अन्य लोगों की तुलना में काफी कम हो सकता है। पर क्या वैक्सीन लंबे समय तक हमें कोरोना के संक्रमण से सुरक्षित रख सकती है, यह सवाल लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। असल में हाल में कई ऐसे अध्ययन सामने आए हैं जिनमें कहा जा रहा है कि वैक्सीनेशन से बनीं एंटीबॉडीज का असर कुछ ही महीनों में कम होना शुरू हो जाता है। इसी से संबंधित इंग्लैंड में चल रहे जनसंख्या के सर्वेक्षण में बड़ा खुलासा हुआ है।
कोरोना से जंग: तो क्या संक्रमण से पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं है वैक्सीन? अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा
टीकाकरण के बाद भी संक्रमित हो रहे हैं लोग
इंपीरियल कॉलेज लंदन और मार्केट रिसर्च कंपनी इप्सोस मोरी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन में 24 जून से 12 जुलाई के बीच 98,233 लोगों के स्वैब लिए गए। इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने हर 160 में से एक व्यक्ति को कोरोनवायरस से संक्रमित पाया। यानी कि टीकाकरण करा लेने के बाद भी लोगों को कोरोना से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। हालांकि अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है, उनकी तुलना में दोनों डोज ले चुले लोगों से वायरस के संक्रमण की संभावना काफी कम हो सकती है।
सौ फीसदी असरदार नहीं हो सकती है कोई भी वैक्सीन
गौरतलब है कि ब्रिटेन में दूसरी लहर के दौरान संक्रमण को रोकने के लिए लगे सभी प्रतिबंधों में 19 जुलाई से छूट देने की घोषणा की जा चुकी है, इसे देखते हुए शोधकर्ताओं ने सभी लोगों से बचाव के उपायों को प्रयोग में लाते रहने की सलाह दी है। इंपीरियल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर और सर्वेक्षण कार्यक्रम के निदेशक पॉल इलियट कहते हैं, वैक्सीन की दोनों डोज संक्रमण के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान करती हैं, हालांकि इसके बाद भी संक्रमण के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि कोई भी टीका 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं है। दोनों डोज ले चुके लोग भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं।
'द लैंसेट' जर्नल में प्रकाशित एक शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि दोनों डोज ले चुके कई लोगों में तीन महीने में ही 50 फीसदी तक एंटीबॉडीज घट जा रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है एस्ट्राजेनेका या फाइजर वैक्सीन की दोनों खुराक के बाद एंटीबॉडी का स्तर शुरू में बहुत अधिक था, जिसे कोरोना के गंभीर संक्रमण के खिलाफ काफी सुरक्षात्मक माना जा सकता है, हालांकि दो-तीन महीनों में इनका स्तर कम होता देखा जा रहा है। कोरोना के नए वैरिएंट्स के बढ़ते मामलों के बीच यह काफी चिंता का कारण हो सकती है।
वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों में भी संक्रमण के खतरे को देखते हुए वैज्ञानिक बूस्टर डोज की आवश्यकताओं पर जोर दे रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, जिस तरह से कोरोना के नए रूपों की संक्रामता देखी जा रही है, ऐसे में माना जा रहा है कि शायद आने वाले दिनों में लोगों को दो डोज के बाद बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है। वैक्सीन का बूस्टर डोज रोगज़नक के खिलाफ प्रतिरक्षा को और मजबूती देने में मदद कर सकती है। समय के साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है ऐसे में बूस्टर डोज की आवश्यकता होना सामान्य है, इससे लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
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नोट: यह लेख इंपीरियल कॉलेज लंदन और मार्केट रिसर्च कंपनी इप्सोस मोरी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। यह अध्ययन अभी जर्नल में प्रकाशित नहीं है।
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