डॉ अल्केश जैन
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ
मेदांता, इंदौर
Medically reviewed by Dr. Alkesh Jain
कोविड-19 को मुख्यरूप से श्वसन संक्रमण की बीमारी के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि संक्रमण की इस दूसरी लहर में वायरस के कारण कई अन्य तरह की समस्याएं भी देखने को मिली हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान एक महत्वपूर्ण अंग जिसे सबसे अधिक प्रभावित पाया गया है वह है- हृदय। डॉक्टर बताते हैं कि वायरस में म्यूटेशन और नए स्ट्रेनों के कारण
कोविड रोगियों में दिल के दौरे पड़ने के मामले देखे गए हैं। इसके अलावा कोविड के कारण हृदय रोगों से पीड़ित युवा और स्वस्थ लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी भी हुई है, जोकि काफी चिंताजनक है। आइए इस लेख में जानते हैं कि कोरोना वायरस, हृदय संबंधी समस्याओं को क्यों बढ़ा रहा है?
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कार्डियक अरेस्ट और हृदय संबंधी जटिलताएं
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कार्डियक अरेस्ट जैसे गंभीर मामले बढ़े
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड के कारण लोगों में खून के थक्के बनने के मामलों में इजाफा देखने को मिला है, जिसका अर्थ है कि कोरोना वायरस लिम्बिक सिस्टम और रक्त वाहिकाओं के लिए भी उतना ही खरतनाक है जितना कि फेफड़ों के लिए। डॉक्टरों बताते हैं कि कुछ मामलों में यह वायरस रक्त के थक्कों का निर्माण कर रहा है जो आंतरिक रक्त वाहिकाओं के अस्तर को नुकसान पहुंचाता है। इसके चलते लोगों में कार्डियक अरेस्ट और हृदय संबंधी अन्य जटिलताओं का जोखिम बढ़ा गया है।
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ब्लड थिनर दवाओं का इस्तेमाल
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क्यों बढ़ रहे हैं हृदय रोगों के मामले?
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अल्केश जैन बताते हैं कि कोविड के इलाज के दौरान ब्लड थिनर दवाओं का बेवजह इस्तेमाल करना इस तरह की समस्याओं का कारण हो सकता है। इसके अलावा कोरोना के समय में अत्यधिक चिंता और भय के कारण शरीर को अधिक रक्त पंप करना पड़ता है जिससे हृदय गति और हृदय पर दबाव बढ़ जाता है। यह भी हृदय संबंधी तमाम समस्याओं का कारण हो सकता है।
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रक्त का थक्का बना रहे हैं कोरोना वायरस
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हृदय रोग और कोरोना संक्रमण
डॉ अल्केश जैन कहते हैं कि कोरोना के रोगियों में संक्रमण के दौरान हृदय से जुड़ी कई तरह की बीमारियों के बारे पता चल रहा है। कुछ मरीजों के हृदय के भीतर की नलियों में खून का थक्का जमने की समस्या का भी निदान किया गया है। यही कारण है कि कोरोना के कई रोगियों को दिल का दौरा भी पड़ रहा है। कोरोना से ठीक हो चुके रोगियों में भी हाल के दिनों में हार्ट अटैक और हृदय के अन्य रोगों का खतरा ज्यादा देखने को मिला है।
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हृदय रोग का खतरा बढ़ा
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नए स्ट्रेनों ने बढ़ा दी है समस्या
डॉ अल्केश कहते हैं कि जिन संक्रमितों में हृदय रोगों का निदान होता है उन्हें इलाज के दौरान ही खून को पतला करने वाली दवाइयां और इंजेक्शन दे दी जाती हैं, लेकिन हर मरीज को इसकी जरूरत नहीं है। इसके अलावा होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना के कई रोगी पल्स रेट कम होने की भी शिकायत कर रहे हैं, ऐसे रोगियों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। कोरोना की पहली लहर में इस तरह के मामले देखने को नहीं मिल रहे थे, लेकिन वायरस के म्यूटेशन के बाद नए स्ट्रेनों ने रोगियों में हृदय रोग की समस्याओं को बढ़ा दिया है।