अच्छी सेहत के लिए शरीर की जिन स्थितियों को सबसे ज्यादा नुकसानदायक माना जाता है, वजन बढ़ना उनमें से एक है। शरीर में अतिरिक्त फैट, खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है। अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से पेट पर बढ़ती चर्बी दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है? बढ़ते फैट के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुख्यरूप से लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी को मुख्य कारण मानते हैं।
हेल्थ अलर्ट: बुजुर्गों की सेहत के लिए कितनी खतरनाक है शरीर में जमा चर्बी? जानिए इसे घटाने का सबसे आसान तरीका
High Body Fat Risks: बढ़ती उम्र में शरीर की अतिरिक्त चर्बी डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और जोड़ों की समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है। वजन को कंट्रोल रखना बुजुर्गों के लिए जरूरी है। एचआईआईटी को बुजुर्गों की सेहत के लिए फायदेमंद पाया गया है।
बुजुर्गों में फैट बढ़ने की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वजन बढ़ने के कारण चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने और रोजमर्रा के काम-काज करने में भी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, शरीर में अतिरिक्त चर्बी नींद और शारीरिक सक्रियता को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए बुजुर्गों के लिए वजन को कंट्रोल में बनाए रखना जरूरी है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम इसमें काफी मददगार हो सकती है।
इसी को लेकर एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि उम्रदराज लोगों में शरीर की चर्बी घटाने के साथ मांसपेशियों को सुरक्षित रखने में हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (एचआईआईटी) अधिक प्रभावी हो सकती है।
- एचआईआईटी ऐसा वर्कआउट है जिसमें कम समय में अधिक तीव्रता वाले व्यायाम किए जाते हैं। इसमें अपनी पूरी ताकत लगाकर (लगभग 80% से 95% अधिकतम हृदय गति पर) एक्सरसाइज की जाती है। विशेषज्ञों ने पाया कि इससे शरीर के फैट को कम करने में मदद मिल सकती है।
अध्ययन में क्या पता चला?
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ द सनशाइन कोस्ट के शोधकर्ताओं के छह महीने के अध्ययन में पाया गया कि इस व्यायाम से बुजुर्गों की चर्बी कम हुई और मांसपेशियां भी हेल्दी रहीं। वहीं, मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम से चर्बी घटने के साथ मांसपेशियों (लीन टिश्यू) में कमी भी दर्ज की गई। लीन टिश्यू का अर्थ है शरीर के वे ऊतक जिनमें फैट की मात्रा कम होती है। इसमें मांसपेशियां, हड्डियां, शरीर के अंग और पानी सहित अन्य ऊतक शामिल होते हैं।
- इस अध्ययन के निष्कर्ष मेडिकल जर्नल मेटुरिटास में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि बदलाव अपेक्षाकृत छोटे लेकिन सटीक थे।
- शोध में ऑस्ट्रेलिया के ग्रेटर ब्रिस्बेन क्षेत्र के 123 स्वस्थ बुजुर्गों को शामिल किया गया। उनकी औसत उम्र 72 वर्ष थी।
- प्रतिभागियों को उच्च, मध्यम और कम तीव्रता वाले व्यायाम समूहों में बांटा गया।
- उन्होंने छह महीने तक सप्ताह में तीन दिन, हर बार 45 मिनट निगरानी में व्यायाम किया।
जिन लोगों ने हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग वाले अभ्यास किए उनमें शरीर के फैट बर्न होने की गति तेज देखी गई।
हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग क्या है?
हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग में कम समय के लिए तेज गति से एक्सरसाइज की जाती है और फिर कुछ समय आराम या हल्की गतिविधि की जाती है। इस प्रक्रिया को कई बार दोहराया जाता है। उदाहरण के लिए, कुछ सेकंड तेजी से साइकिल चलाना या तेज गति से चलना और उसके बाद धीमी गति से व्यायाम करना। इस तरह की ट्रेनिंग से कम समय में शारीरिक सक्रियता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
- अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित रूप से एचआईआईटी का अभ्यास हृदय की कार्यक्षमता, सहनशक्ति और इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।
- इसके अलावा, यह शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता बढ़ाने और वजन को कंट्रोल रखने में भी मदद करती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अध्ययन में एचआईआईटी के लाभ जरूर देखे गए हैं। हालांकि हर व्यक्ति के लिए ये फायदेमंद नहीं है। पहले से हृदय रोग, जोड़ों या अन्य किसी क्रॉनिक बीमारी से जूझ रहे लोगों को इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। बिना विशेषज्ञ की सलाह के अचानक तेज गति का व्यायाम शुरू कर देने से हड्डियों-मांसपेशियों में चोट लगने या हार्ट रेट बहुत ज्यादा बढ़ जाने की समस्या हो सकती है।
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स्रोत:
Exercise intensity influences body composition: a 6-month comparison of high-intensity interval, moderate- and low-intensity training among healthy older adults
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