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अलर्ट: चेहरे में टेढ़ापन के साथ आवाज में लड़खड़ाहट को क्यों गंभीर मानते हैं डॉक्टर? लापरवाही से जा सकती है जान

Tue, 27 Oct 2026 01:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 27 Oct 2026 01:04 PM IST
सार

Brain Stroke Risks: स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें मस्तिष्क तक रक्त की आपूर्ति रुकने या रक्त वाहिकाओं के फटने से नुकसान होता है। चेहरे का टेढ़ापन, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी और बोलने में परेशानी होना इसके प्रमुख संकेत हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें। समय पर इलाज से गंभीर नुकसान का खतरा कम हो सकता है।

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ब्रेन स्ट्रोक के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Amarujala.com/AI

हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक दुनियाभर में मौत का प्रमुख कारण रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्ट्रोक वैश्विक स्तर पर मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है, इसके अलावा स्ट्रोक से जान बच जाने की स्थिति में कई लोगों को लकवा की दिक्कत हो जाती है, जिससे गंभीर स्थितियों में दिव्यांगता का खतरा रहता है। दुनियाभर में हर साल स्ट्रोक के कारण 70 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है और हर साल लगभग 1.2 करोड़ लोगों को स्ट्रोक आता है। मतलब स्ट्रोक के खतरों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना बहुत जरूरी है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें इलाज मिलने में हुई थोड़ी-सी देरी भी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। चिंता की बात ये भी है कि आमतौर पर लोगों को स्ट्रोक के लक्षण शुरू में समझ नहीं आते जिससे इलाज मिलने में देरी हो सकती है।

आइए जानते हैं कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्ट्रोक के मामलों में हर एक मिनट को कीमती क्यों मानते हैं?

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ब्रेन स्ट्रोक के खतरे - फोटो : Adobe Stock

स्ट्रोक में समय पर इलाज मिल जाए तो मरीज की जान बचाने के साथ स्थायी दिव्यांगता का खतरा भी कम किया जा सकता है। चेहरे का एक तरफ झुकना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी आना और बोलने में परेशानी होना इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे संकेत दिखने पर घरेलू उपचार करने या लक्षणों के अपने आप ठीक होने का इंतजार करने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

एम्स न्यूरोसाइंस सेंटर के प्रमुख डॉ. शैलेश बी. गायकवाड़ के अनुसार स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सकीय आपातस्थिति है। इसमें मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है या रक्तवाहिका फटने से रक्तस्राव होने लगता है। इसके दो प्रमुख प्रकार हैं। 
 

  • इस्केमिक स्ट्रोक में रक्त का थक्का मस्तिष्क की रक्तवाहिका को अवरुद्ध कर देता है।
  • जबकि हेमरेजिक स्ट्रोक में रक्तवाहिका फटने से मस्तिष्क में खून बहने लगता है। दोनों का उपचार अलग-अलग होता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, धूम्रपान, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता स्ट्रोक का खतरा बढ़ाते हैं।
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स्ट्रोक में समय पर इलाज जरूरी - फोटो : Adobe Stock

शुरुआती घंटों में इलाज से बच सकती है जान

अस्पताल में सीटी स्कैन या एमआरआई से स्ट्रोक के प्रकार का पता लगाया जाता है। इस्केमिक स्ट्रोक के चुनिंदा मरीजों को लक्षण शुरू होने के साढ़े चार घंटे के भीतर थक्का घोलने वाली दवा दी जा सकती है। बड़ी रक्तवाहिकाओं में थक्का होने पर उपयुक्त मरीजों में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी से कैथेटर के जरिए थक्का निकाला जा सकता है। चयनित मरीजों में यह प्रक्रिया 24 घंटे तक लाभकारी हो सकती है।

रक्तस्राव वाले स्ट्रोक में रक्तचाप नियंत्रण और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की जाती है।

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ब्रेन स्ट्रोक के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Amarujala.com/AI

आवाज में बदलाव खतरे का संकेत

स्ट्रोक की पहचान के लिए इसके लक्षणों को समझना जरूरी है।

कई बार चेहरे का एक तरफ झुकने, हाथों-पैरों में अचानक कमजोरी आने, बोलने में लड़खड़ाहट या शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन लोग इन्हें थकान, कमजोरी या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है।
 

  • स्ट्रोक में दिमाग के किसी हिस्से तक खून की सप्लाई रुक जाती है या मस्तिष्क की रक्तवाहिका फट जाती है। ऐसे में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर पहचान, सही जांच मरीज की जान बचाने के लिए बहुत जरूरी है।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: ये रूपायन में प्रकाशित कंटेट है। अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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