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Diabetes Type 1.5: देश में डायबिटीज का नया संकट, 5-10% मरीज टाइप 1.5 का शिकार; जानिए इसके लक्षण और खतरे

Tue, 30 Sep 2025 07:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 30 Sep 2025 07:40 PM IST
सार

  •  हाल के वर्षों में डॉक्टरों ने डायबिटीज के एक प्रकार टाइप-1.5 के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई है। इसे लाडा के नाम से भी जाना जाता है।
  • रिपोर्ट्स बताती हैं, भारत में डायबिटीज टाइप 1.5 के मरीजों की संख्या 5-10% तक हो सकती है।

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भारत में डायबिटीज के मामले - फोटो : Adobe stock

Diabetes Risk: डायबिटीज के बढ़ते मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। ये सिर्फ ब्लड शुगर बढ़े रहने की स्थिति नहीं है, इसके कारण हृदय, किडनी, आंखों और तंत्रिकाओं से संबंधित समस्याओं का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। भारतीय आबादी भी तेजी से इस खतरनाक रोग की चपेट में आ गई है। यहां डायबिटीज के बढ़ते मामलों का आलम ये है कि भारत को 'डायबिटीज कैपिटल' तक कहा जाने लगा है।



मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि देश में हर साल लाखों डायबिटीज के नए मरीज सामने आ रहे हैं। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि 20 से 40 साल की उम्र के लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ गड़बड़ जीवनशैली, तनाव, आहार में गड़बड़ी, नींद और शारीरिक गतिविधियों में कमी को इसका सबसे बड़ा कारण मानते हैं।

डायबिटीज वैसे तो कई प्रकार की हो सकती है पर आमतौर पर इसके दो मुख्य प्रकारों टाइप-1 और टाइप-2 की सबसे ज्यादा चर्चा होती है। हाल के वर्षों में डॉक्टरों ने डायबिटीज के एक और प्रकार टाइप-1.5 के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई है। इसे लाडा के नाम से भी जाना जाता है। रिपोर्ट्स बताती हैं, भारत में डायबिटीज टाइप 1.5 के मरीजों की संख्या 5-10% तक हो सकती है।

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डायबिटीज टाइप 1.5 का खतरा - फोटो : Freepik.com

टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में जानिए

टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में सबसे कम चर्चा होती है, यही कारण है कि अक्सर लोगों में इसका सही निदान भी नहीं हो पाता है।

यह टाइप-1 डायबिटीज का एक सबटाइप है। शोधकर्ताओं का मानना है कि आमतौर पर 30 वर्ष से अधिक आयु वालों में इस समस्या का निदान होता है। गौर करने वाली बात यह भी है कि इसके अधिकतर लक्षण टाइप-2 की तरह ही हो सकते हैं।  यानी यह हाइब्रिड रूप है, जिसे पहचानना और समय पर इलाज करना और भी मुश्किल हो जाता है।

ऐसे लोगों को भी इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता होती रह सकती है। यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर में विकसित होती है।

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डायबिटीज का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com

टाइप-2 और टाइप 1.5 में कंफ्यूजन

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (एडीए)और यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज (ईएएसडी) के एक ताजा शोध अध्ययन के अनुसार लाडा की शुरुआत में लक्षण टाइप 2 डायबिटीज से मिलते-जुलते होते हैं। कई मरीजों को शुरुआत में टाइप-2 का रोगी मानकर दवाइयां दी जाती हैं, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ने पर असली कारण सामने आता है। यही वजह है कि इस बीमारी को मिसडायग्नोसिस डिजीज भी कहा जाता है।

रिपोर्ट बताती है कि टाइप 1.5 डायबिटीज वाले मरीजों में ब्लड शुगर लंबे समय तक असंतुलित रहता है। ऐसे में हृदय रोग, किडनी डैमेज और आंखों की रोशनी प्रभावित होने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

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मधुमेह और उसका खतरा - फोटो : Adobe stock

टाइप 1.5 डायबिटीज की पहचान कैसे करें?

विशेषज्ञ बताते हैं कि चूंकि इसके लक्षण अन्य प्रकार के डायबिटीज से मिलते-जुलते होते हैं इसलिए इसका सही निदान थोड़ा मुश्किल हो जाता है।  

टाइप 1.5 डायबिटीज में भी आपको बार-बार प्यास लगना, अत्यधिक पेशाब आना, अचानक बिना कारण वजन घटना,लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना, हल्की भूख के बावजूद ब्लड शुगर का तेजी से बढ़ना, जख्म या कट लगने पर देर से भरना और धुंधला दिखाई देने की समस्या हो सकती है।

शुगर मॉनिटर करने पर लगातार बढ़ा हुआ ग्लूकोज स्तर डायबिटीज का संकेत होता है जिसको लेकर डॉक्टर की सलाह जरूरी है। सुबह खाली पेट शुगर लेवल 125 एमजी/डीएल से ऊपर और भोजन के बाद 200  से अधिक रहना अलार्मिंग हो सकता है।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

एम्स के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. विवेक अग्रवाल का कहना है कि भारत में मधुमेह की विशाल आबादी है और इसमें से 5-10 प्रतिशत मरीज लाडा से पीड़ित हो सकते हैं। समस्या यह है कि अधिकांश मामलों में इसे टाइप 2 मानकर इलाज किया जाता है। अगर समय रहते सही पहचान हो जाए तो मरीज गंभीर जटिलताओं से बच सकते हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल 10 करोड़ से अधिक डायबिटीज के मरीज हैं।

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नए प्रकार का डायबिटीज टाइप-5 - फोटो : Amarujala.com

डायबिटीज-टाइप-5 को लेकर भी चर्चा

दुनियाभर के तमाम विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य संस्थाओं से डायबिटीज के एक सबसे कम चर्चित और उपेक्षित प्रकार- टाइप-5 डायबिटीज को औपचारिक रूप से मान्यता देने का आग्रह किया है, जो युवा और दुबले-पतले लोगों को अधिक प्रभावित करती है। माना जाता है कि दुनियाभर में 2.5 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं।

एक तरफ जहां टाइप-2 डायबिटीज के लिए खान-पान में गड़बड़ी (हाई कैलोरी) को प्रमुख कारण माना जाता है, वहीं टाइप-5 डायबिटीज पर्याप्त भोजन न करने से शुरू होता है। यानी ये नई बीमारी मुख्य रूप से उन किशोरों और युवा वयस्कों में देखी जा रही है जिनका वजन कम होता है या जिन्होंने बचपन में गंभीर खाद्य असुरक्षा का अनुभव किया है क्योंकि कुपोषण उनकी इंसुलिन स्रावित करने की क्षमता को प्रभावित करता है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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