कोरोनावायरस पिछले तीन साल से अधिक समय से गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को कारण बना हुआ है। डेल्टा जैसे वैरिएंट्स से संक्रमण की स्थिति में न सिर्फ गंभीर रोगों के विकसित होने का खतरा देखा गया है, साथ ही लॉन्ग कोविड भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लिए चिंता बढ़ा रही है। कोरोना का जोखिम अब भी दुनिया के कई देशों में देखा जा रहा है।
Covid-19 Study: संक्रमण ने इस अंग को कर दिया है बहुत कमजोर, लॉन्ग कोविड और मौत का भी बढ़ा खतरा
युवाओं में हृदय रोगों का खतरा
कोरोना के दुष्प्रभावों को जानने के लिए किए गए एक हालिया अध्ययन के अनुसार महामारी के पहले दो वर्षों के दौरान, मार्च 2020 से मार्च 2022 तक, संयुक्त राज्य अमेरिका में हृदय रोग के कारण 90,000 से अधिक मौतें हुईं। गंभीर विषय ये रहा है कि संक्रमण के शिकार रहे युवा वयस्कों में भी हृदय संबंधी रोग और इसके कारण मौत के मामलों में इजाफा दर्ज किया गया है।
महामारी की अवधि के दौरान दिल के दौरे से होने वाली मौतों में सबसे अधिक मामले 25 से 44 वर्ष की आयु वाले लोगों में देखे गए हैं। कोविड संक्रमण के गंभीर मामलों के दौरान होने वाली जटिलताओं के अलावा, संक्रमण के एक साल बाद तक दिल के दौरे, स्ट्रोक और अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ा हुआ देखा जा रहा है।
संक्रमण के कारण बढ़ी इंफ्लामेशन की समस्या
क्लीवलैंड क्लिनिक में सेंटर फॉर ब्लड प्रेशर डिसऑर्डर के सह-निदेशक और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ल्यूक लाफिन बताते हैं, कोरोनावायरस और हृदय रोगों का बड़ा संबंध देखा गया है, इंफ्लामेशन का बढ़ना इसका मुख्य कारण है। हम जानते हैं कि इंफ्लामेशन ही हृदय संबंधी जोखिमों को बढ़ाती है। पहले के अध्ययनों में भी इस बात पर जोर दिया जाता रहा है कि संक्रामक रोग, विशेष रूप से कोविड -19 के गंभीर संक्रमण की स्थिति सूजन का कारण बन सकती है।
ब्लड क्लॉटिंग के कारण बढ़ रहा है गंभीर रोगों का खतरा
शोधकर्ता बताते हैं, किसी भी संक्रमण या चोट की स्थिति में प्रतिरक्षा प्रणाली, प्रतिक्रिया के रूप में प्रोटीन रिलीज करती है जो सूजन और रक्त के थक्के बनने को बढ़ावा देती है। कुछ स्थितियों में ये क्लॉटिंग, दिल का दौरा या स्ट्रोक का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों की धमनियों में पहले से ही प्लाक की समस्या रही है, जैसे धूम्रपान करने वाले और हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल वाले लोग, उनमें कोविड-19 के कारण गंभीर हृदय रोगों के विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है।
हल्के लक्षण वाले लोग भी हो रहे हैं शिकार
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि लगभग 21 प्रतिशत लोग जो कोविड संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे और लगभग 11 प्रतिशत लोग जिन्हें हल्का संक्रमण था और अस्पताल में भर्ती भी नहीं हुए थे, उनमें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या विकसित हो गई।
शोध से पता चला है कि जिन लोगों का कोरोना वैक्सीनेशन हुआ था, उनमें कोविड संक्रमण के बाद दिल का दौरा या स्ट्रोक होने की आशंका लगभग 40 से 60 प्रतिशत कम देखी गई। टीके कोविड की गंभीरता को कम करते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जिन लोगों को कोरोना का संक्रमण रह चुका है, उन्हें एहतियातन हृदय स्वास्थ्य की जांच करा लेनी चाहिए।
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स्रोत और संदर्भ
Excess risk for acute myocardial infarction mortality during the COVID-19 pandemic
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