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Covid-19 Study: संक्रमण ने इस अंग को कर दिया है बहुत कमजोर, लॉन्ग कोविड और मौत का भी बढ़ा खतरा

Mon, 11 Sep 2023 12:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 11 Sep 2023 12:20 PM IST
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covid 19 short and long-term risk on cardiovascular health, Covid can immediately affect the heart
कोरोना के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : iStock

कोरोनावायरस पिछले तीन साल से अधिक समय से गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को कारण बना हुआ है। डेल्टा जैसे वैरिएंट्स से संक्रमण की स्थिति में न सिर्फ गंभीर रोगों के विकसित होने का खतरा देखा गया है, साथ ही लॉन्ग कोविड भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लिए चिंता बढ़ा रही है। कोरोना का जोखिम अब भी दुनिया के कई देशों में देखा जा रहा है।



ओमिक्रॉन और इसके कुछ नए सब-वैरिएंट्स के कारण यूके सहित कई देशों में तेजी से संक्रमण के हालात और अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी रिपोर्ट की गई है। नए वैरिएंट्स की संक्रामकता और इसकी प्रकृति को देखते हुए कई कंपनियों ने वैक्सीन को भी अपडेट करना शुरू कर दिया है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के कारण न सिर्फ संक्रमण के दौरान गंभीर रोग का खतरा रहा है साथ ही लॉन्ग कोविड में भी रोगियों में कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं। इस संबंध में किए गए एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि वायरस ने वैसे तो कई अंगों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, पर हृदय स्वास्थ्य पर इसका सबसे गंभीर असर देखा जा रहा है। कोरोना संक्रमितों में हृदय रोगों से मौत के मामले भी काफी बढ़े हैं।

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कोरोना का हृदय स्वास्थ्य पर असर - फोटो : istock

युवाओं में हृदय रोगों का खतरा

कोरोना के दुष्प्रभावों को जानने के लिए किए गए एक हालिया अध्ययन के अनुसार महामारी के पहले दो वर्षों के दौरान, मार्च 2020 से मार्च 2022 तक, संयुक्त राज्य अमेरिका में हृदय रोग के कारण 90,000 से अधिक मौतें हुईं। गंभीर विषय ये रहा है कि संक्रमण के शिकार रहे युवा वयस्कों में भी हृदय संबंधी रोग और इसके कारण मौत के मामलों में इजाफा दर्ज किया गया है। 

महामारी की अवधि के दौरान दिल के दौरे से होने वाली मौतों में सबसे अधिक मामले 25 से 44 वर्ष की आयु वाले लोगों में देखे गए हैं। कोविड संक्रमण के गंभीर मामलों के दौरान होने वाली जटिलताओं के अलावा, संक्रमण के एक साल बाद तक दिल के दौरे, स्ट्रोक और अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ा हुआ देखा जा रहा है।

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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा और बचाव - फोटो : istock

संक्रमण के कारण बढ़ी इंफ्लामेशन की समस्या

क्लीवलैंड क्लिनिक में सेंटर फॉर ब्लड प्रेशर डिसऑर्डर के सह-निदेशक और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ल्यूक लाफिन बताते हैं, कोरोनावायरस और हृदय रोगों का बड़ा संबंध देखा गया है, इंफ्लामेशन का बढ़ना इसका मुख्य कारण है। हम जानते हैं कि इंफ्लामेशन ही हृदय संबंधी जोखिमों को बढ़ाती है। पहले के अध्ययनों में भी इस बात पर जोर दिया जाता रहा है कि संक्रामक रोग, विशेष रूप से कोविड -19 के गंभीर संक्रमण की स्थिति सूजन का कारण बन सकती है।

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हार्ट रोगों की बढ़ती समस्याएं - फोटो : istock

ब्लड क्लॉटिंग के कारण बढ़ रहा है गंभीर रोगों का खतरा

शोधकर्ता बताते हैं, किसी भी संक्रमण या चोट की स्थिति में प्रतिरक्षा प्रणाली, प्रतिक्रिया के रूप में प्रोटीन रिलीज करती है जो सूजन और रक्त के थक्के बनने को बढ़ावा देती है। कुछ स्थितियों में ये क्लॉटिंग, दिल का दौरा या स्ट्रोक का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों की धमनियों में पहले से ही प्लाक की समस्या रही है, जैसे धूम्रपान करने वाले और हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल वाले लोग, उनमें कोविड-19 के कारण गंभीर हृदय रोगों के विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। 

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हृदय स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : iStock

हल्के लक्षण वाले लोग भी हो रहे हैं शिकार

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि लगभग 21 प्रतिशत लोग जो कोविड संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे और लगभग 11 प्रतिशत लोग जिन्हें हल्का संक्रमण था और अस्पताल में भर्ती भी नहीं हुए थे, उनमें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या विकसित हो गई।

शोध से पता चला है कि जिन लोगों का कोरोना वैक्सीनेशन हुआ था, उनमें कोविड संक्रमण के बाद दिल का दौरा या स्ट्रोक होने की आशंका लगभग 40 से 60 प्रतिशत कम देखी गई। टीके कोविड की गंभीरता को कम करते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जिन लोगों को कोरोना का संक्रमण रह चुका है, उन्हें एहतियातन हृदय स्वास्थ्य की जांच करा लेनी चाहिए।




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स्रोत और संदर्भ
Excess risk for acute myocardial infarction mortality during the COVID-19 pandemic

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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