इस समय फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन को लेकर दुनियाभर में खूब चर्चा चल रही है, क्योंकि इन्हें 90-95 फीसदी तक प्रभावी बताया गया है, लेकिन इसी के साथ अमेरिका में एक सांसद ने ऐसी बात कह दी है, जिससे एक नई बहस छिड़ गई है। दरअसल, वहां के सांसद रैंड पॉल ने ट्वीट करके कहा है कि कोरोना के संक्रमण से ठीक होने के बाद शरीर में जो 'प्राकृतिक इम्यूनिटी' बनती है, वह कोरोना वैक्सीन के मुकाबले बेहतर होती है। उनका कहना है कि कोरोना की 'प्राकृतिक इम्यूनिटी' 99.9982 फीसदी होती है। इसपर विशेषज्ञ क्या कहते हैं, आइए जानते हैं उसके बारे में...
2 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टोरंटो यूनिवर्सिटी की इम्यूनोलॉजिस्ट जेनिफर गोमरमैन का कहना है कि 'प्राकृतिक इम्यूनिटी' वैक्सीन के मुकाबले बेहतर होती है, यह सिद्धांत पूरी तरह सही नहीं है। दरअसल, यह अनुमान लगाना कठिन है कि कौन कोरोना के संक्रमण से बच जाएगा, लेकिन वैक्सीन का प्राथमिक लाभ यह है कि यह उम्मीद के मुताबिक और सुरक्षित है और प्रभावी प्रतिरक्षा भी पैदा कर रही है।
3 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैक्सीन लगने के बाद उतनी मात्रा में इम्यूनिटी तो बन ही जाती है कि अगर लोग वायरस से संक्रमित हो जाएं तो गंभीर रूप से बीमार नहीं पड़ेंगे। इसके अलावा इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि यह कोरोना से बीमार होने के मुकाबले सुरक्षित है।
4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के महामारी रोग विशेषज्ञ बिल हैनेज का कहना है कि जो लोग कोरोना के संक्रमण की वजह से हल्के बीमार हुए हैं, उनमें इम्यूनिटी कुछ महीने में कम हो सकती है। ऐसे में उन लोगों को वैक्सीन से काफी फायदा मिल सकता है।
5 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
एक और बड़ा सवाल जो लोगों के मन में आजकल उठ रहे हैं, वो ये कि जो लोग पहले संक्रमित हो चुके हैं, उनके शरीर में तो कोरोना के खिलाफ इम्यूनिटी बन चुकी है, तो क्या उन लोगों को भी वैक्सीन लेनी होगी? इसपर वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की वायरोलॉजिस्ट मैरिअन पेपर का कहना है कि ऐसे लोगों की इम्यूनिटी वैक्सीन लेने के बाद और भी बेहतर हो जाएगी, इसका कोई नुकसान नहीं होगा।