आज से करीब एक साल पहले वैज्ञानिकों को कोविड-19 बीमारी फैलने वाले सार्स-कोव-2 (Sars-Cov-2) कोरोना वायरस के बारे में तब पता चला जब चीन के वुहान में कुछ लोगों के इससे संक्रमित होने की खबर आई। लेकिन एक नए शोध के अनुसार महामारी का कारण बना ये वायरस इससे कई सप्ताह पहले लोगों को संक्रमित कर चुका था। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन (सीडीसी) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस शोध के नतीजों को क्लिनिकल इन्फेक्शियस डिजीज नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
Coronavirus: चीन से फैलना शुरू नहीं हुआ कोरोना वायरस, नए शोध में हैरान करने वाला खुलासा
शोध के नतीजे क्या कहते हैं?
इस शोध के अनुसार, अमेरिका में 13 दिसंबर 2019 से लेकर 17 जनवरी 2020 के हुए ब्लड डोनेशन में कुल 7,389 लोगों ने खून दिया था। इनमें से 106 लोगों के खून के नमूनों में कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज मिली हैं। किसी व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडीज मिलने का मतलब है कि वो व्यक्ति वायरस से संक्रमित हुआ है और उसके रोग प्रतिरोधक तंत्र ने उस वायरस से निपटने के लिए एंटीबॉडीज बनाई हैं। कैलिफोर्निया, ओरेगॉन और वॉशिंगटन में 13 से 16 दिसंबर के बीच लिए गए खून के नमूनों में से 39 में कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज हैं। शोध के अनुसार, 67 नमूने जनवरी के महीने में मैसेचुसैट्स, मिशिगन, रोड आइलैंड और विस्कॉन्सिन में जमा किए गए थे। ये इन राज्यों में महामारी का प्रकोप बढ़ने से कहीं पहले था। अधिकतर लोग जो इस वायरस के संपर्क में आए थे वो पुरुष थे और उनकी औसत उम्र 52 साल थी।
शोधकर्ताओं का मानना है कि हो सकता है कि इन लोगों के शरीर में पहले से ही मौजूद किसी कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बन गई हों। हालांकि उनका कहना है कि शोध के अनुसार अधिकतर लोग जिनमें एंटीबॉडीज मिले हैं उनमें से कई लोगों में उस वक्त कोविड-19 के लक्षण भी मौजूद थे। हालांकि शोधकर्ता कहते हैं कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर वायरस का संक्रमण फरवरी के आखिरी सप्ताह में ही फैलना शुरू हुआ, लेकिन अब तक वायरस की उत्पत्ति को लेकर जो जानकारी है क्या इस शोध से उसमें कोई बदलाव आएगा?
आखिर वायरस सबसे पहले कहां पाया गया?
सार्स-कोव-2 (Sars-Cov-2) वायरस सबसे पहले कहां पाया गया, इस सवाल का उत्तर देना शायद कभी संभव न हो सके। इस तरह के कई संकेत मिले हैं कि ये वायरस दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में पाए जाने से कई सप्ताह पहले से ही दुनिया में मौजूद था। लेकिन सीडीसी के शोधकर्ताओं का कहना है कि वो इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ कह नहीं सकते कि ये लोग अपने देश में ही संक्रमित हुए थे या फिर यात्रा के दौरान वो वायरस की चपेट में आए थे। ब्लड डोनेशन कार्यक्रम का आयोजन करने वाली संस्था रेड क्रॉस का कहना है कि जिन लोगों के नमूने इकट्ठा किए गए थे, उनमें से केवल तीन फीसदी ने कहा था कि उन्होंने हाल में विदेश यात्रा की है। इसमें से पांच फीसदी का कहना था कि वो एशियाई देश के दौरे से लौटे हैं।
इससे पहले हुए कुछ और शोध में भी चीन की चेतावनी देने से पहले दूसरे देशों के लोगों में कोरोना वायरस होने के सबूत मिले थे। इसी साल मई में फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने कहा कि 27 दिसंबर को पेरिस के नजदीक एक व्यक्ति का इलाज संदिग्ध निमोनिया मरीज के तौर पर किया गया था। ये व्यक्ति वास्तव में कोरोना वायरस से संक्रमित थे। कई देशों में शोधकर्ताओं ने सीवर के पानी के नमूनों में कोरोना वायरस पाए जाने की बात की थी। ये नमूने महामारी की घोषणा से कई सप्ताह पहले लिए गए थे।