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Coronavirus: अधिक गंभीर मामलों का कारण नहीं बनता कोरोना का ब्रिटेन स्ट्रेन, नए शोध में दावा

Tue, 02 Feb 2021 02:58 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Tue, 02 Feb 2021 02:58 PM IST
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Coronavirus new study says britain covid 19 strain does not cause more severe cases
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

ब्रिटेन में मिला कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन संक्रामक जरूर है, लेकिन यह अधिक गंभीर मामलों का कारण नहीं बनता है। यह किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों का कहना है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि यह स्ट्रेन जिस रफ्तार से फैल रहा है, अगर यह लोगों को संक्रमित करता है तो इससे अधिक लोगों की मौत हो सकती है। ऐसी आशंकाएं थीं कि B.1.1.7 नाम से जाना जाने वाला यह स्ट्रेन पुराने वायरस तुलना में अधिक खतरनाक हो सकता है, इसके अलावा यह 70 फीसदी तक अधिक संक्रामक हो सकता है। ब्रिटेन के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वॉलेंस ने पिछले महीने लंदन में हुई एक प्रेस वार्ता में कहा था कि यह अधिक घातक प्रतीत हुआ है। 

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Coronavirus new study says britain covid 19 strain does not cause more severe cases
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं द्वारा सितंबर से दिसंबर 2020 के बीच ब्रिटेन में 55,000 कोरोना मरीजों की मृत्यु दर की तुलना पर किए गए एक अध्ययन में देश के दक्षिण और पूर्व में नए स्ट्रेन के संक्रमण के अधिक मामले वाले क्षेत्रों और कम संक्रमण संख्या वाले क्षेत्रों के बीच 'कोई खास अंतर' नहीं पाया गया। इस दौरान शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि रोग की गंभीरता का संकेत देने वाले लक्षण भी दोनों प्रकार के रोगियों के साथ मेल खाते हैं।  

Coronavirus new study says britain covid 19 strain does not cause more severe cases
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

शोधकर्ताओं का कहना है कि 0.7 फीसदी की दर से नए स्ट्रेन से संक्रमित कोरोना मरीजों में पुन: संक्रमण के मामलों की दर प्रभावी रूप से मूल वायरस से संक्रमित मरीजों के समान ही थी। प्रमुख शोधकर्ता डॉ. मार्क ग्राहम कहते हैं, 'हमारे अध्ययन से पता चलता है कि नया स्ट्रेन पुराने स्ट्रेन की तुलना में अधिक संक्रामक है। यह वास्तव में नए स्ट्रेन की मृत्यु दर में वृद्धि से अधिक चिंताजनक है, क्योंकि प्रसार की घातीय प्रवृति के कारण यह अधिक लोगों को संक्रमित करेगा और इस प्रकार अधिक लोगों की मौत की संभावना बढ़ जाएगी। 

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Coronavirus new study says britain covid 19 strain does not cause more severe cases
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मारिया वान केरखोव ने बीते सोमवार को बताया कि ब्रिटेन में पाया गया कोरोना का स्ट्रेन अब तक 82 देशों में फैल चुका है, जबकि दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन लगभग 40 देशों में फैला है। इसके अलावा कोविड-19 का ब्राजील स्ट्रेन भी नौ देशों में फैल चुका है। अमेरिका में इन तीनों ही स्ट्रेन से संक्रमण के मामले सामने आए हैं। अमेरिका ने पुष्टि की है कि उसके यहां ब्रिटेन वाले स्ट्रेन के 467 मामले, दक्षिण अफ्रीका वाले स्ट्रेन के तीन मामले और ब्राजील वाले स्ट्रेन का एक मामला देखने को मिला है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कई वैज्ञानिक यह दावा कर चुके हैं कि मौजूदा वैक्सीन कोरोना के नए स्ट्रेन पर भी प्रभावी होंगी। ऐसा दावा करने वालों में जर्मनी की मशहूर फार्मा कंपनी बायोएनटेक भी शामिल है। बायोएनटेक के मुख्य कार्यकारी उगर साहिन ने हाल ही में कहा था कि यह नया स्ट्रेन पहले वाले वायरस से 99 फीसदी मेल खाता है, इसलिए हमें भरोसा है कि इसपर भी हमारी वैक्सीन प्रभावी होगी। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा था कि पुख्ता तौर पर कुछ भी कहने के लिए अभी इसपर और अधिक शोध की जरूरत है। 

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