वैक्सीन के अलावा कोरोना वायरस के इलाज में काम आने वाली दवाओं की खोज लगातार जारी है। पहले हुए अध्ययनों में रेमडेसिविर दवा को कोरोना के इलाज में काफी कारगर बताया गया था, लेकिन बाद में कहा गया कि इस दवा का कोरोना के कारण मौत की दर पर कोई असर नहीं होता है। अब एक बार फिर से एक अध्ययन के मुताबिक कहा जा रहा है कि यह दवा काफी प्रभावी 'एंटी वायरल' हो सकती है। हालांकि यह अध्ययन एक ही मरीज पर आधारित है। यह नया अध्ययन 'नेचर कम्युनिकेशंस' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रेमडेसिविर दवा का विकास वैसे तो हेपेटाइटिस-सी के लिए हुआ था, लेकिन बाद में इबोला और कोरोना वायरस के खिलाफ भी इसका परीक्षण किया गया।
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- फोटो : Pixabay
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन में कैंब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 'एक्सएलए' से पीड़ित 31 वर्षीय एक व्यक्ति पर इस दवा का परीक्षण किया। दरअसल, 'एक्सएलए' प्रतिरक्षा संबंधी एक दुर्लभ बीमारी है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है, जिसकी वजह से शरीर को संक्रमण से लड़ने में दिक्कत होती है।
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अध्ययन के मुताबिक, 31 वर्षीय व्यक्ति में पहले कोरोना के आम लक्षण (बुखार, कफ, चक्कर आना और उल्टी) देखने को मिले। जांच में उसे संक्रमित पाया गया, लेकिन कई दिनों तक उसमें ये लक्षण बने रहे, जिसके बाद 30वें दिन उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया और सांस लेने में परेशानी होने की वजह से उसे ऑक्सीजन भी दिया गया।
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कैंब्रिज विश्वविद्यालय के जेम्स थावेनतिरन ने बताया कि पहले मरीज का इलाज हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन जैसी दवाइयों से किया गया, जिसका कुछ खास असर नहीं पड़ा, जिसके बाद 34वें दिन इलाज रोक दिया गया और फिर मरीज को दस दिनों के लिए रेमडेसिविर दवा दी गई। इस दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि महज 36 घंटे के अंदर मरीज के बुखार और सांस लेने में तकलीफ में कमी आई और साथ ही चक्कर और उल्टी जैसी शिकायतें भी खत्म हो गईं। इसके बाद 43वें दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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हालांकि अस्पताल से छुट्टी दिए जाने के एक हफ्ते बाद ही मरीज को फिर से बुखार, चक्कर आना और सांस लेने में परेशानी शुरू हो गई, जिसके बाद 54वें दिन उसे फिर से अस्पताल में भर्ती कराया गया और ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ गई। दरअसल, वह फिर से कोरोना से संक्रमित पाया गया था। 61वें दिन उसे फिर से दस दिनों के लिए रेमडेसिविर दवा देनी शुरू की गई। इस दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि उसके लक्षणों में एक बार फिर से तेजी से सुधार होने लगा और बाद में उसे ऑक्सीजन की भी जरूरत नहीं पड़ी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 69वें और 70वें दिन 'कोनवालसेंट प्लाज्मा' के साथ अतिरिक्त इलाज के तीन दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल वह व्यक्ति ठीक है और उसमें कोरोना के कोई भी लक्षण नहीं हैं।