महिलाओं की सेहत में पीरियड्स यानी मासिक धर्म का नियमित होना बहुत जरूरी संकेत माना जाता है। आमतौर पर मासिक चक्र लगभग 28 दिनों का होता है, लेकिन हर महिला में इसकी अवधि अलग हो सकती है। डॉक्टर बताती हैं, ज्यादातर महिलाओं में 21 से 35 दिनों के बीच का चक्र सामान्य माना जाता है। अगर पीरियड्स कभी समय से पहले, कभी बहुत देर से आएं या कई महीनों तक बंद रहें, तो इस तरह की दिक्कतों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।
सेहत की बात: हर महीने बदल रही है पीरियड्स की तारीख? शरीर में पल तो नहीं रही कोई बीमारी?
Irregular Periods: अनियमित पीरियड्स के पीछे तनाव, वजन में बदलाव, थायरॉइड की समस्या और हार्मोनल गर्भनिरोधक जैसे कई कारण हो सकते हैं। बार-बार मासिक चक्र बदलने, अत्यधिक रक्तस्राव या तीन महीने तक पीरियड्स न आने पर डॉक्टर से सलाह लें।
पीरियड्स की दिक्कतें
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि तनाव, अधिक वजन या मोटापा, हार्मोनल असंतुलन और थायरॉइड जैसी समस्याओं का पीरियड्स पर असर हो सकता है। इन बीमारियों पर अगर ध्यान न दिया जाए तो शरीर में कई अन्य तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
- डॉक्टर बताती हैं, किशोरावस्था में पीरियड्स शुरू होने के शुरुआती वर्षों और मेनोपॉज के आसपास भी चक्र अनियमित हो सकता है।
- हालांकि, हर बार अगर ये अनियमितता बनी रहती है तो इसपर गंभीरता से ध्यान देते हुए कारणों को समझना बहुत जरूरी है।
पीरियड्स अनियमित होने के क्या कारण होते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई स्वास्थ्य समस्याएं मासिक धर्म चक्र को प्रभावित करने वाली हो सकती हैं।
- एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन मासिक चक्र को नियंत्रित करते हैं। इनके संतुलन में गड़बड़ी से पीरियड्स जल्दी या देर से आ सकते हैं।
- पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) में ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है। इसके कारण पीरियड्स देर से आने, मुंहासे, वजन बढ़ने या चेहरे पर ज्यादा बाल आने और बहुत ज्यादा थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। पीसीओएस को अब पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस) के नाम से जाना जाता है।
- थायरॉइड हार्मोन कम या ज्यादा बनने से मासिक चक्र प्रभावित हो सकता है।
- लंबे समय तक मानसिक तनाव रहना भी शरीर के हार्मोनल नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं।
कब हो जाएं अलर्ट?
डॉक्टर कहती हैं, वैसे तो एक-दो बार पीरियड्स अनियमित होने पर घबराने की जरूरत नहीं है, हालांकि अगर लगातार आपको ये समस्या बनी रहती है तो इसके कारणों को जानने के लिए डॉक्टर से मिलना बहुत जरूरी है। कुछ स्थितियां बनी रहती हैं तो सावधान हो जाना चाहिए।
- पीरियड्स का सामान्य पैटर्न अचानक बदल जाए।
- लगातार तीन महीने तक पीरियड्स न आएं।
- ब्लीडिंग सात दिनों से अधिक चले या बहुत ज्यादा हो।
- पीरियड्स के बीच में बार-बार रक्तस्राव हो।
- अनियमित पीरियड्स के साथ वजन बढ़ने, चेहरे पर बाल आने या अत्यधिक थकान की समस्या रहती हो तो भी सावधान हो जाएं।
पीरियड्स को नियमित कैसे रखें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लाइफस्टाइल और खान-पान में सुधार करके न सिर्फ आप पीरियड्स को नियमित रख सकती हैं साथ ही इससे संपूर्ण स्वास्थ्य को लाभ मिलता है।
सबसे जरूरी है कि आप संतुलित भोजन और रोजाना पर्याप्त नींद लें। व्यायाम की आदत बनाएं और तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें। पीरियड्स की तारीख, अवधि और रक्तस्राव का रिकॉर्ड रखें। बिना डॉक्टर की सलाह के पीरियड्स नियमित करने वाली हार्मोनल दवाएं न लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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