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सेहत की बात: मौसम बदलते ही गले में खराश और खांसी क्यों होती है? जानें 6 बड़े कारण

Mon, 26 Oct 2026 03:02 PM IST
श्रुति गौड़ हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रुति गौड़ Updated Mon, 26 Oct 2026 03:02 PM IST
सार

Causes Of Sore Throat: मौसम बदलते ही गले में खराश और खांसी क्यों होती है? इसके प्रमुख कारण, लक्षण, बचाव के घरेलू उपाय इस लेख में जानें।

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causes of sore throat and dry cough during weather change in india
गले में खराश और खांसी से बचने के 7 आसान उपाय - फोटो : AI
 Causes Of Sore Throat: मौसम में बदलाव होते ही कई लोगों को गले में खराश, सूखी खांसी, नाक बहने और गले में दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। खासकर गर्मी से सर्दी या सर्दी से गर्मी के मौसम में तापमान और हवा में नमी का बदलाव शरीर को प्रभावित कर सकता है। 


कई बार शुरुआत में होने वाली हल्की खराश कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन लगातार खांसी या गले में दर्द को नजरअंदाज करना सही नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि मौसम बदलते ही गले में खराश और खांसी क्यों होने लगती है? क्या ठंडी चीजें खाने से यह समस्या बढ़ती है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं इसके प्रमुख कारण, लक्षण, बचाव के उपाय और डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए।
 
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causes of sore throat and dry cough during weather change in india
गले में खराश और खांसी से बचने के 7 आसान उपाय - फोटो : AI
 मौसम बदलते ही गले में खराश और खांसी होने के 6 प्रमुख कारण

1. वायरल संक्रमण

मौसम बदलने के दौरान सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसे वायरल संक्रमण हो सकते हैं। इनके कारण गले में दर्द, खराश, नाक बहना, खांसी और कभी-कभी बुखार भी हो सकता है। ज्यादातर वायरल संक्रमण कुछ दिनों में ठीक होने लगते हैं।

2. तापमान और नमी में बदलाव

तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव और शुष्क हवा गले तथा सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकती है। इससे गला सूखने, बार-बार खंखारने और हल्की खांसी की समस्या हो सकती है। हालांकि, केवल मौसम बदलने से संक्रमण नहीं होता; खांसी के पीछे दूसरे कारण भी हो सकते हैं।

 
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गले में खराश और खांसी से बचने के 7 आसान उपाय - फोटो : AI
 3. धूल-मिट्टी और वायु प्रदूषण

धूल, धुआं और हवा में मौजूद बारीक प्रदूषक कण गले और सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं। दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में प्रदूषण बढ़ने पर पहले से अस्थमा या एलर्जी से परेशान लोगों की समस्या बढ़ सकती है।

 4. एलर्जी की समस्या

कुछ लोगों को धूल, परागकण, फफूंद या अन्य एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों से परेशानी होती है। इसके कारण छींक, नाक बहना, गले में खुजली और सूखी खांसी हो सकती है। यदि लक्षण किसी खास वातावरण में बढ़ते हैं, तो एलर्जी भी इसकी वजह हो सकती है।

 
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गले में खराश और खांसी से बचने के 7 आसान उपाय - फोटो : AI
 5. ठंडी और शुष्क हवा

ठंडी या शुष्क हवा गले की नमी को प्रभावित कर सकती है। कुछ लोगों में इससे गले में खराश और खांसी बढ़ जाती है। अस्थमा से पीड़ित लोगों में ठंडी हवा सांस की नलियों को भी प्रभावित कर सकती है।

 6. धूम्रपान और तेज खुशबू वाले उत्पाद

सिगरेट का धुआं, अगरबत्ती, तेज परफ्यूम और कुछ सफाई उत्पादों के धुएं से गले में जलन हो सकती है। यदि पहले से खांसी या एलर्जी है, तो इन चीजों के संपर्क से परेशानी बढ़ सकती है।
 
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गले में खराश और खांसी से बचने के 7 आसान उपाय - फोटो : AI

 गले में खराश और खांसी से बचने के 7 आसान उपाय
  • गुनगुना पानी पिएं: दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। गुनगुने तरल पदार्थ गले की परेशानी को कुछ हद तक शांत कर सकते हैं।
  •  नमक-पानी से गरारे करें: एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर गरारे करें और पानी थूक दें। छोटे बच्चों को यह उपाय नहीं कराना चाहिए।
  • धूल और धुएं से बचें: घर में धूल जमा न होने दें और धूम्रपान वाले वातावरण से दूर रहें।
  • बाहर निकलने से पहले AQI जांचें: प्रदूषण ज्यादा होने पर बाहरी गतिविधियां कम करें। जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें।
  • हाथों की सफाई रखें: साबुन से हाथ धोएं और सर्दी-जुकाम से पीड़ित लोगों के साथ निकट संपर्क कम रखें।
  •  पर्याप्त आराम करें: नींद पूरी लें और शरीर को आराम दें, खासकर जब खांसी के साथ थकान या बुखार हो।
  •  बिना सलाह एंटीबायोटिक न लें: ज्यादातर गले की खराश वायरल संक्रमण के कारण होती है। एंटीबायोटिक वायरस पर असर नहीं करती और इसका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: ये रूपायन में प्रकाशित कंटेट है। अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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