लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने पूरी सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। लिहाजा बीपी-शुगर जैसी जो बीमारियां पहले अक्सर बुजुर्गों को हुआ करती थीं, वह अब कम उम्र वालों को भी अपना शिकार बनाती जा रही हैं। दिनचर्या की गड़बड़ी का हमारी हड्डियों पर भी असर देखा जा रहा है। कम उम्र में ही लोग गठिया जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं जिसका असर उनकी कार्यक्षमता और रोजमर्रा का जिंदगी पर पड़ सकता है।
बोन हेल्थ: आर्थराइटिस, ऑस्टियोआर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस में क्या अंतर है? क्या होता है हड्डियों पर असर
Bone Problems: आर्थराइटिस जोड़ों में सूजन और उनसे जुड़ी बीमारी को कहा जाता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों की कार्टिलेज और आसपास के ऊतकों में बदलाव होता है, जबकि ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां बेहद कमजोर हो जाती हैं। तीनों अलग-अलग बीमारियां हैं, क्या आप इनके बारे में जानते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आर्थराइटिस, ऑस्टियोआर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर लोग एक ही समझ लेते हैं, जबकि ये तीनों अलग-अलग समस्याएं हैं।
- आर्थराइटिस जोड़ों से संबंधित कई बीमारियों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक व्यापक शब्द है।
- ऑस्टियोआर्थराइटिस, आर्थराइटिस का एक प्रकार है, जिसमें जोड़ों के कार्टिलेज यानी हड्डियों के सिरों को ढकने वाला मुलायम ऊतक धीरे-धीरे खराब होने लगता है।
- वहीं ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और वे कमजोर होकर आसानी से टूट सकती हैं।
पहले आर्थराइटिस के बारे में जान लीजिए
आर्थराइटिस (गठिया) किसी एक बीमारी का नाम नहीं है। ये जोड़ों की सूजन या बीमारी के लिए इस्तेमाल होने वाला एक सामान्य शब्द है जिसमें 100 से अधिक प्रकार की स्थितियां शामिल हैं।
- गठिया की समस्या के कारण जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और उन्हें हिलाने-डुलाने में परेशानी हो सकती है। अलग-अलग प्रकार के आर्थराइटिस के कारण भी अलग-अलग होते हैं। आमतौर पर उम्र बढ़ने, आनुवंशिक कारणों और जीवनशैली से जुड़ी गड़बड़ियों की वजह से ये दिक्कतें होती हैं।
ऑस्टियोआर्थराइटिस के बारे में समझिए
ऑस्टियोआर्थराइटिस, आर्थराइटिस का सबसे आम प्रकार है। इसमें जोड़ों की कार्टिलेज और आसपास के ऊतकों में धीरे-धीरे बदलाव होने लगता है। यह समस्या घुटनों, कूल्हों, हाथों और रीढ़ में ज्यादा देखने को मिलती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस में हड्डियों के सिरों को सुरक्षित रखने वाला कार्टिलेज समय के साथ घिस जाता है। कार्टिलेज के घिसने से हड्डियां आपस में रगड़ने लगती हैं, जिससे दर्द और जकड़न होती है।
- ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण चलने पर दर्द, घुटनों में सूजन और जोड़ों को हिलाने-डुलाने में भी परेशानी हो सकती है।
- यह केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है। जोड़ों में पुरानी चोट के कारण युवाओं को भी यह समस्या हो सकती है।
- अच्छी बात ये है कि नियमित रूप से हल्के स्तर के व्यायाम, वजन कम करना और डॉक्टर की सलाह से दवाएं लेना आपकी दिक्कतों को कम करने में मददगार हो सकता है।
अब ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में जान लीजिए
ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों का घनत्व बहुत कम हो जाता है और हड्डियां भुरभुरी सी होने लगती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। इसकी खास बात यह है कि शुरुआती दौर में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। वैसे तो 35 साल की उम्र के बाद हड्डियों का घनत्व स्वाभाविक रूप से कम होने लगता है, लेकिन लाइफस्टाइल से संबंधित समस्याएं कम उम्र में भी इसका खतरा बढ़ा सकती हैं।
- मेनोपॉज के बाद हार्मोन में बदलाव, शारीरिक गतिविधियों में कमी और कुछ दवाओं के कारण भी आपको ये बीमारी हो सकती है।
- कम उम्र से ही आहार में कैल्शियम और विटामिन-डी वाली चीजें लेते रहना, वजन कंट्रोल रखना, संतुलित खानपान और धूम्रपान से दूरी हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने में मददगार हो सकती है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।