आज दिल्ली के उपहार कांड की 20वीं बरसी है। 13 जून 1997 को उपहार सिनेमा हॉल में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। देश की राजधानी के बीचोबीच हुए इस हादसे में 59 लोगों की जान चली गई जबकि सैकड़ों घायल हुए थे। हालांकि उपहार अग्निकांड ना देश का पहला ऐसा हादसा था जिसने पूरे देश को गम के आंसुओं में डूबो दिया न आखिरी, इससे पहले और बाद में कई ऐसे हादसे हुए हैं जो इतिहास के पन्नों पर कालिख पोत गए। आइए डालते हैं ऐसे ही हादसों पर एक नजर।
भोपाल गैसकांडः गैस रिसने से हो गई थी 15000 से ज्यादा की मौत
इसे भारत के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी कहा जाता है जिसमें 15000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। भोपाल के यूनियन कार्बाइड कंपनी के कारखाने से मिथाइलआइसोसाइनाइट नामक जहरीली गैस के रिसाव के कारण हजारों लोग मारे गए। सरकार ने अधिकारिक तौर पर 3,787 लोगों के मरने की पुष्टि की। जबकि एक अनुमान के मुताबिक 8 हजार से ज्यादा लोगों की मौत दो हफ्ते में हो गई थी। सालों बाद सरकार ने अपने शपथपत्र में बताया कि हादसे से 558125 लोग सीधे तौर पर जबकि 38478 आशिंक और 3900 लोग बुरी तरह प्रभावित हुए।
ट्रेन हादसाः उफनती बागमती नदी में गिरे ट्रेन के 7 डिब्बे, 800 की मौत
देश का सबसे बड़ा ट्रेन हादसा हुआ था बिहार की बागमती नदी पर। 6 जून 1981 को मानसी से सहरसा की तरफ जा रही ट्रेन के 9 में से 7 डिब्बे उफान मारती नदी में समा गए थे। हादसे में 800 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। पूरा जोर लगाकर भी गोताखोर 286 लाशें ही निकाल पाए। हालांकि कहा ये भी जाता है कि कम से 2000 लोगों की मौत हादसे में हुई, क्योंकि सात डिब्बों में से एक भी आदमी नहीं बच सका था।
विमान हादसाः जब हवा में टकराए दो विमान, 349 लोगों की मौत
देश का सबसे खतरनाक विमान हादसा 12 नवंबर 1996 को हरियाणा के चरखी दादरी में हुआ था, जहां हवा में ही दो विमान टकराने के कारण 349 लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि हवा में टकराए दोनों विमान भारत के ना होकर सऊदी अरब और कजाकिस्तान एयरलाइन के थे। हादसे में कोई भी जिंदा नहीं बच सका था।
फिरोजाबाद बस अग्निकांडः बस में आग लगने से जिंदा जले 63 लोग
फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में दिसंबर 2008 में हुए हादसे में एक सवारी बस में आग लगन से 63 लोग जिंदा जल गए थे। सवारी बस मथुरा से सुल्तानपुर के लिए जा रही थी तभी शाम 5 बजे के करीब अचानक आग की लपटों से घिर गई। अंदर बैठी सवारियों को बाहर जाने का कोई मौका नहीं मिल सका और 70 के करीब लोग जिंदा जल गए, जिनमें से 63 लोगों की मौत हो गई।