जोसफ जब भी खड़े होंगे, उनका कद पहले से छह इंच बढ चुका होगा। लेकिन इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी है। वह चार महीनों से बिस्तर पर हैं। अभी दोबारा चल पाने में उन्हें दो से तीन महीने और लगेंगे। जोसफ ने बताया, "मैंने अब तक कमाए सारे पैसे इस ऑपरेशन पर खर्च कर दिए हैं। ये बहुत जोखिम भरा काम था। लेकिन मेरे लिए कद बढाना बहुत जरूरी था। मैं हीन भावना का शिकार हो रहा था। दक्षिण अमरीका के जिस देश में मैं रहता हूं वहाँ सबका कद कम से कम छह फुट होता है।" जोसफ हॉलैंड में बतौर पुरुष नर्स काम करते हैं। उन्होंने दो साल तक दिन-रात मेहनत करके ऑपरेशन के पैसे जमा किए और दिल्ली आए। वे बताते हैं, "अब मेरी जेब पूरी तरह से खाली हो चुकी है, लेकिन मुझे कोई पछतावा नहीं है।"
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हड्डियां तुड़वाकर क़द बढ़ाने का ये शौक !
सुहैल हलीम/ बीबीसी संवाददाता
Updated Sun, 24 Jul 2016 07:50 PM IST
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- फोटो : BBC
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दिल्ली में हड्डी विशेषज्ञ डॉक्टर अमर सरीन ने उनकी सर्जरी की। सरीन का दावा है कि वे पिछले पांच सालों में कद बढाने वाले करीब तीन सौ ऑपरेशन कर चुके हैं। यह बेहद तकलीफदेह और जटिल सर्जरी है और बहुत महंगी भी। उन्होंने बताया, "सर्जरी के लिए जब कोई मेरे पास आता है तो पहले मैं उन्हें टालने की कोशिश करता हूँ। पूछता हूँ कि क्या तुम पागल हो गए हो? फिर भी वह नहीं मानता तो यह देखता हूं कि ऑपरेशन से उनका जीवन किस तरह बदलेगा? क्या जो सपना उन्होंने देखा है वह पूरा हो सकता है ?" कद बढाने के इस असाधारण ऑपरेशन में पैर की हड्डियों को तोड़कर उनमें स्टील की रॉड डाली जाती है। इसी रॉड की सहायता से रोजाना हड्डियों में एक मिलीमीटर का गैप या अंतर पैदा किया जाता है। धीरे-धीरे हड्डी बढ़ जाती है और कद भी। एक हड्डी को अधिकतम तीन इंच तक बढ़ाया जा सकता है। इसलिए जोसफ ने अपनी जांघ और घुटने से नीचे वाली हड्डी, दोनों में यह ऑपरेशन कराया है।
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उनके बराबर वाले कमरे में दो बहनें फोन पर कोई गेम खेल रही हैं। उनका संबंध राजस्थान से है। और दोनों का ऑपरेशन हो चुका है। उन्होंने अपना अनुभव बताया, "हमारा कद इतना छोटा था कि शादी में दिक्कत हो रही थी। हमने सोचा कि कद बढ़ेगा तो हम और अच्छे नजर आएंगे। दर्द तो होगा लेकिन सह लेंगे।" लेकिन जब उनका कद अचानक बढ़ेगा तो वे अपनी दोस्तों और रिश्तेदारों को क्या बताएंगी? उन्होंने कहा, "हमने इस बारे में बहुत सोचा। अगर हम कहेंगे कि हमने दवाई खाई तो सब पूछेंगे, कौन सी? इसलिए हम कहेंगे कि हमने कई तरीके इस्तेमाल किए थे, पता नहीं किससे लंबाई बढ़ गई।" लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिनके सपने पूरे नहीं हुए। हैदराबाद के 21 साल के निखिल रेड्डी का कद पांच फुट सात इंच था। यह भारत में पुरुषों का औसत कद है। लेकिन फिर भी उन्होंने अपने माता-पिता से छिपकर यह ऑपरेशन कराया और अब पछता रहे हैं।
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वे बताते हैं, "डॉक्टरों ने मुझसे कहा था कि मैं पंद्रह दिनों में काम पर लौट सकता हूं। अब कई महीने हो गए हैं। दर्द असहनीय था इसलिए कद बढ़ाने की कोशिश बीच में ही छोड़ दी है। अब बिस्तर पर पडा हूँ। व्हील चेयर में बैठने के लिए भी कई लोगों की मदद लेनी पडती है।" निखिल ने अब उस अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है जहां उनका ऑपरेशन किया गया था। अब उनका कहना है, "मैं सबको यही कहूंगा कि ये ऑपरेशन ना कराएं।" पूरे देश में कितने ऑपरेशन हो रहे हैं इसका डाटा उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर और मरीज दोनों ही सामने आने से बचते हैं। लेकिन डॉक्टर सरीन का दावा है कि यह ऑपरेशन अवैध नहीं है। वो कहते हैं, "अगर सेक्स बदलने का ऑपरेशन हो सकता है तो कद बढ़ाने का क्यों नहीं?" साइबेरिया में कद बढाने की इस तकनीक की खोज की गई थी। अब यह दुनिया के कई देशों में इस्तेमाल की जाती है। आदे चलकर ऑपरेशन का सेहत पर क्या असर पडेगा, यह अभी साफ नहीं है। सरकार की ओर से कोई निगरानी प्रणाली भी नहीं है।
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डॉक्टर सरीन के मुताबिक यह एक जटिल ऑपरेशन है। इसमें मांसपेशियों और नसों के नुकसान का खतरा रहता है। जोसफ को इन खतरों के बारे में पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद वे एक नई ऊंचाई से दुनिया को देखना चाहते थे। अब अपने लंबे कद के साथ हॉलैंड लौटने की तैयारी में हैं। लेकिन निखिल की हालत विपरीत है। उनको तो बस इस बात का इंतजार है कि वे फिर से अपने पैरों पर कब तक खडे हो पाएंगे। (पहचान जाहिर न हो इसलिए इस रिपोर्ट में असली नामों का उपयोग नहीं किया गया है।)